आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस उम्मीदवार को बेहतर आरक्षित पद का हक: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
22 Aug 2026 9:26 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरक्षित वर्ग का ऐसा उम्मीदवार, जो मेरिट के आधार पर ओपन कैटेगरी में चयनित हुआ है, आरक्षित वर्ग में उससे कम अंक पाने वाले उम्मीदवार की तुलना में बेहतर पद पाने का हकदार है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस संबंध में कानून पूरी तरह स्थापित है और संविधान पीठ के Union of India v. Ramesh Ram, (2010) 7 SCC 234 सहित कई फैसलों में इसे दोहराया जा चुका है।
मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 6वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षित वर्ग के उन उम्मीदवारों को सेवा आवंटन से जुड़ा है, जिन्होंने ओपन मेरिट में चयन हासिल किया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने अधिक अंक हासिल किए और ओपन कैटेगरी में चयनित हुए, फिर भी उन्हें झारखंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस नहीं दी गई, जबकि आरक्षित वर्ग में उनसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को यह सेवा आवंटित की गई।
चार याचिकाकर्ताओं में चंदन (SC), संजय कुमार महतो (EBC-I), गौतम कुमार (EBC) और कुमार अविनाश (SC) शामिल हैं। इनके अंक क्रमशः 611, 621, 619 और 606 थे, लेकिन इन्हें सूचना, वित्त और योजना जैसी सेवाएं मिलीं।
झारखंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में ओपन कैटेगरी का अंतिम चयनित उम्मीदवार 631 अंक वाला था। वहीं पुलिस, वित्त, शिक्षा, सहकारिता, सामाजिक सुरक्षा, सूचना और योजना सेवाओं की कट-ऑफ क्रमशः 679, 614, 614, 613, 613, 611 और 600 अंक थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि प्रतिवादियों का दावा था कि याचिकाकर्ताओं ने कुछ छूट (relaxation) का लाभ लिया था। हालांकि, कोर्ट को इस दावे के समर्थन में कोई सामग्री नहीं मिली।
कोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC को यह स्पष्ट करने के लिए छह सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है कि क्या याचिकाकर्ताओं ने किसी प्रकार की छूट का लाभ लिया था।
पीठ ने यह भी एक संबंधित मुद्दा उठाया है कि यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार ओपन कैटेगरी में जाने के बाद फिर आरक्षित पद पर भेजा जाता है, तो ऐसी स्थिति में अनारक्षित उम्मीदवारों की स्थिति क्या होगी।
मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।


