सुप्रीम कोर्ट ने अपने केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड तक पहुंच की मांग वाली PIL को खारिज किया

Shahadat

15 July 2026 7:58 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड तक पहुंच की मांग वाली PIL को खारिज किया

    सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें नागरिकों को कोर्ट के केस मैनेजमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले 'फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर' (FOSS) का अध्ययन करने की अनुमति मांगी गई।

    सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता के पास सुरक्षा पहलुओं को प्रभावित किए बिना सोर्स कोड साझा करने का कोई प्रस्ताव है, तो वह उसे साझा कर सकता है।

    कोर्ट ने आदेश दिया,

    "हम अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, अगर याचिकाकर्ता के पास सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री या संस्थान के कामकाज में सुधार के लिए कोई उपयोगी सुझाव है तो ऐसे सुझावों का हमेशा स्वागत है। उन्हें उचित रूप से शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।"

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनील अह्या द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता रजिस्ट्री को अपने सुझाव दे सकता है।

    संक्षेप में मामला

    याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को निर्देश देने की मांग करते हुए याचिका दायर की कि वह केस मैनेजमेंट सिस्टम से संबंधित प्रशासनिक नीति को 'फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर' (FOSS) के लाइसेंसिंग ढांचे और उसके सिद्धांतों के अनुरूप बनाए, क्योंकि इस सिस्टम में FOSS का ही इस्तेमाल किया जाता है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि भारत के नागरिकों को FOSS के उद्देश्यों के लिए केस मैनेजमेंट सिस्टम का 'एंड-यूज़र' (अंतिम उपयोगकर्ता) माना जाए। FOSS एंड-यूज़र को इसके सिद्धांतों के अनुसार सॉफ्टवेयर का अध्ययन करने की स्वतंत्रता देता है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि "ऐसी पारदर्शिता FOSS को अपनाने में निहित है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(a) के अनुरूप है।"

    सुनवाई के दौरान, खुद पेश हुए याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि FOSS का उपयोग करने वाले CMS सॉफ्टवेयर को अध्ययन और जांच के लिए एंड-यूज़र (नागरिकों) के लिए उपलब्ध होना चाहिए। हालांकि, इस विषय पर कोर्ट की प्रशासनिक नीति FOSS के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

    CJI ने कहा,

    "अगर आपके पास बेहतर कामकाज के लिए कोई सुझाव है तो कृपया अपने सुझाव दें। हम रजिस्ट्री को उन सुझावों पर विचार करने का निर्देश देंगे। इस तरह की रिट याचिका दायर न करें।"

    इस पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि रजिस्ट्री ने उन्हें कोर्ट की एक नीति के बारे में सूचित किया, जिसके अनुसार CMS सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड साझा नहीं किया जा सकता है।

    उनकी बात सुनकर जस्टिस बागची ने कहा,

    "यहां हो रहे ट्रांज़ैक्शन के लिए एक फ़्री और ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर के बारे में सोचिए, जिसमें प्राइवेसी और सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दे हैं। इसलिए ओपन सोर्स को एक्सेस करने के लिए हमें फ़ायरवॉल की ज़रूरत है। इससे सॉफ़्टवेयर प्रोप्राइटरी नहीं बन जाता, क्योंकि हम ओपन सोर्स का इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन साइबर सिक्योरिटी फ़ायरवॉल के साथ। इससे उसका स्वरूप नहीं बदलता... इसलिए अगर आपके पास कोई ऐसा सुझाव है, जिससे सिक्योरिटी से समझौता किए बिना ओपन सोर्स को शेयर किया जा सके तो आप हमें [सुझाव] दे सकते हैं।"

    याचिकाकर्ता ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा,

    "सिक्योरिटी सोर्स कोड को छिपाने से नहीं मिलती। हमने ओपन सोर्स कोड अपनाया है, जिसका मतलब है कि हमें लगता है कि यह सुरक्षित है।"

    आख़िरकार, CJI ने कहा कि चूंकि यह याचिका जनहित में है, इसलिए अगर याचिकाकर्ता के पास कोई अच्छे सुझाव हैं, तो वह उन्हें बता सकते हैं और कोर्ट उन्हें शामिल करने की कोशिश करेगा।

    यह देखते हुए कि बेंच याचिका पर विचार करने के मूड में नहीं थी, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के CMS को ओपन सोर्स नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने कहा,

    "इसे क्लोज़्ड सोर्स सॉफ़्टवेयर या प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर कहा जाना चाहिए।"

    लेकिन बेंच उनकी बात से सहमत नहीं हुई।

    Case Title: SUNIL AHYA v. THE SECRETARY GENERAL, THE SUPREME COURT OF INDIA AND ANR., Diary No. 17407-2026

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