सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मिलने के बाद भी व्यक्ति को डेढ़ महीने तक हिरासत में रखने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई, पूछा- क्यों न मुआवजा दिया जाए?
Shahadat
4 Nov 2026 6:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा कि एक व्यक्ति को जमानत मिलने के बाद भी डेढ़ महीने तक अवैध रूप से हिरासत में रखने के लिए उसे मुआवजा क्यों न दिया जाए।
शुरुआत में ही, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इस मामले को 'असामान्य' और 'परेशान करने वाला' बताया। बेंच ने गौर किया कि आरोपी अभी भी जेल में है, जो कि उसे जमानत देने वाले कोर्ट के पिछले आदेश का खुला उल्लंघन है।
बेंच ने टिप्पणी की,
"हमारे सामने एक बहुत ही असामान्य मामला है। यह काफी परेशान करने वाला है और हम इसका गंभीरता से संज्ञान ले रहे हैं।"
आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 108 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) की धारा 66D के तहत अपराध दर्ज किए गए। उसे उत्तर प्रदेश के बागपत में दर्ज एक FIR के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।
याचिकाकर्ता पर मुख्य रूप से साइबर धोखाधड़ी और धमकियां देने के आरोप थे, जिससे मृतक को मानसिक परेशानी हुई और अंततः उसने आत्महत्या की।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी पर बिना किसी ठोस सुनवाई के 12 बार तारीखें आगे बढ़ाई गईं। हाई कोर्ट ने अंतरिम या नियमित रिहाई की मांग पर कोई फैसला नहीं लिया। इससे परेशान होकर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में बिताई गई अवधि, कानूनी कार्यवाही के चरण और मामले के तथ्यों व परिस्थितियों पर विचार करते हुए 28 सितंबर, 2026 को उसे नियमित जमानत दी।
आरोपी द्वारा दायर इस आवेदन में कोर्ट के जमानत आदेश के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया। इसमें बताया गया कि 28 सितंबर, 2026 को जमानत मिलने के आदेश के बावजूद वह जेल में ही रहा।
बेंच ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
साथ ही राज्य सरकार से यह भी पूछा,
"इस तथ्य के बावजूद कि इस कोर्ट ने डेढ़ महीने पहले ही जमानत पर रिहाई का आदेश दिया था, याचिकाकर्ता को अब तक अवैध रूप से हिरासत में रखने के लिए उसे उचित मुआवजा क्यों न दिया जाए?"
अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह आदेश की कॉपी इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दे।
इस मामले की अगली सुनवाई 3-12-2026 को तय की गई।
Case Title : SADDAM VERSUS STATE OF UP

