आंध्र प्रदेश में SIR के कारण स्थानीय निकाय चुनाव टालने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट, नई वोटर लिस्ट जारी नहीं हुई तो पुरानी सूची से होंगे चुनाव
Praveen Mishra
9 Oct 2026 4:59 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के कारण स्थानीय निकाय चुनावों को टाला नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित नहीं होती है, तो मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 1 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्टीकरण दिया।
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) और राज्य सरकार को ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने और अधिमानतः छह सप्ताह के भीतर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।
SIR की अंतिम मतदाता सूची 16 अक्टूबर को प्रकाशित होने का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान पीठ ने गौर किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने SIR के तहत अंतिम मतदाता सूची 16 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग ने अभी तक स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जारी नहीं की है।
सीनियर एडवोकेट सी. आर्यमा सुंदरम ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि हाईकोर्ट ने 1 जनवरी, 2026 की स्थिति के अनुसार मतदाता सूची के आधार पर छह सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। यदि इस बीच SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो संशोधित मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि लगभग 44 लाख मतदाताओं के नाम इस आधार पर सूची से हटाए गए हैं कि वे मौजूद नहीं पाए गए, जबकि नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया 16 अक्टूबर तक पूरी होने का संकेत दिया है।
अधिसूचना से पहले सूची प्रकाशित हुई तो संशोधित सूची से होंगे चुनाव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव के लिए किस मतदाता सूची का इस्तेमाल होगा, यह SIR की प्रक्रिया पूरी होने और चुनाव अधिसूचना जारी होने के समय पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने कहा कि यदि अंतिम संशोधित मतदाता सूची चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रकाशित हो जाती है, तो चुनाव उसी संशोधित सूची के आधार पर कराए जाएंगे।
हालांकि, यदि चुनाव की अधिसूचना जारी होने तक अंतिम SIR सूची प्रकाशित नहीं होती है, तो लागू राज्य कानूनों के अनुसार मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू होने मात्र से पहले से लागू मतदाता सूची स्वतः अमान्य नहीं हो जाती।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर ने बताया कि अभी चुनावों की अधिसूचना जारी नहीं हुई है और निर्वाचन आयोग द्वारा नई सूची प्रकाशित किए जाने तक लागू मतदाता सूची प्रभावी रहेगी।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने छह सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने को कहा था
यह मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 1 अक्टूबर के फैसले से जुड़ा है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में देरी, वार्ड परिसीमन और चुनाव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मतदाता सूची से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य के शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 17 मार्च, 2026 को समाप्त हो गया था, जबकि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 2 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुआ था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू करने और अधिमानतः छह सप्ताह के भीतर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया था कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मी चरण सेन बनाम ए.के.एम. हसन उज्जमान फैसले पर भरोसा किया था। इस फैसले में कहा गया था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण जारी होने मात्र से मौजूदा सूची अमान्य नहीं हो जाती और न ही यह अपने आप चुनाव स्थगित करने का आधार बनता है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और स्थानीय निकाय चुनाव कराने की प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। SIR के कारण चुनाव अपने आप स्थगित नहीं होंगे और चुनाव अधिसूचना जारी होने के समय लागू कानूनी स्थिति के अनुसार मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाएगा।

