सुप्रीम कोर्ट ने राज्य मानवाधिकार आयोगों में खाली पदों को भरने के लिए दायर PIL पर नोटिस जारी किया
Shahadat
5 Oct 2026 7:24 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक PIL पर नोटिस जारी किया। इस PIL में देश भर के राज्य मानवाधिकार आयोगों में खाली पदों को कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के भीतर भरने की मांग की गई।
कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा, क्योंकि उसे बताया गया कि ज़्यादातर राज्य मानवाधिकार आयोग या तो खाली पड़े हैं या काम नहीं कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया,
"यहां तक कि NHRC की वेबसाइट भी अपडेट नहीं है।"
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों के एसोसिएशन द्वारा दायर PIL पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता यह सुनिश्चित करना चाहता है कि राज्य मानवाधिकार आयोग, 'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' की धारा 21 और 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पूरी तरह से काम करें।
याचिका में राज्यों को निर्देश देने की मांग की गई कि वे चेयरमैन और सदस्यों के खाली पदों को एक तय समय-सीमा के भीतर भरें। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड के बारे में कहा गया कि इन राज्यों में आयोग काम नहीं कर रहे हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और मेघालय के मामले में याचिकाकर्ता लंबे समय से चल रही 'कार्यवाहक चेयरमैन' की व्यवस्था को हटाकर स्थायी नियुक्तियां करने की मांग कर रहा है।
याचिका में यह भी मांग की गई कि राज्य SHRC को ज़रूरी प्रशासनिक, जांच और तकनीकी स्टाफ़ उपलब्ध कराएं, जिसमें वरिष्ठ सरकारी और पुलिस अधिकारी शामिल हों। साथ ही SHRC की सालाना रिपोर्ट को उनकी वेबसाइट और पब्लिक डोमेन में पब्लिश करने और संबंधित राज्य विधानसभाओं के सामने पेश करने की भी मांग की गई।
याचिकाकर्ता उन SHRC को शिकायतें भेजने से रोकने की भी मांग कर रहा है, जहां कोई काम करने वाला चेयरमैन या सदस्य नहीं है। इसके अलावा, यह मांग की गई कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड में काम न कर रहे आयोगों को पहले ही भेजी जा चुकी शिकायतों की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिए डेटा मांगा जाए।
इन सबके अलावा, याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट से समय-समय पर अनुपालन हलफनामे/स्टेटस रिपोर्ट के ज़रिए लगातार निगरानी करने की भी मांग कर रहा है।
Case Title : ASSOCIATION OF RETIRED JUDGES OF SUPREME COURT AND HIGH COURTS OF INDIA Versus NATIONAL HUMAN RIGHTS COMMISSION AND ORS.

