सुप्रीम कोर्ट ने DERC में रेगुलर नियुक्तियों के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश देने वाली PIL पर नोटिस जारी किया

Shahadat

19 May 2026 10:22 AM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने DERC में रेगुलर नियुक्तियों के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश देने वाली PIL पर नोटिस जारी किया

    सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली सरकार (NCT) को दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) में सदस्य के पद पर रेगुलर नियुक्तियां करने के लिए एक चयन समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने वकील प्रणव सचदेवा (याचिकाकर्ता-NGO 'एनर्जी वॉचडॉग' की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।

    संक्षेप में मामला

    यह PIL दिल्ली सरकार से बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 84 और 85 के प्रावधानों के अनुसार, साथ ही 2025 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिए गए आश्वासन [संदर्भ: दिल्ली सरकार बनाम भारत संघ, WP(C) 1222/2023] के अनुरूप DERC में रेगुलर नियुक्तियां करने का निर्देश देने की मांग करती है। उस आश्वासन में कहा गया था कि "रेगुलर नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्रता से पूरी की जाएगी"।

    याचिकाकर्ता ने आगे यह भी प्रार्थना की कि प्रस्तावित चयन समिति DERC सदस्य के रूप में कानून के क्षेत्र से कम-से-कम एक व्यक्ति को नामित करे और अधिनियम की धारा 85 में निर्धारित समय-सीमाओं का पालन करे।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि उपरोक्त निर्देशों के बावजूद, और साथ ही 'गुजरात राज्य बनाम यूटिलिटी यूजर्स वेलफेयर एसोसिएशन' मामले में 2018 के फैसले के बावजूद, दिल्ली सरकार DERC में अध्यक्ष/सदस्य के पद पर रेगुलर नियुक्तियां करने के लिए कोई कदम उठाने में विफल रही है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि 'यूटिलिटी यूजर्स' मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने DERC के सदस्य के रूप में एक न्यायिक सदस्य/कानून के जानकार व्यक्ति को शामिल करना अनिवार्य किया था।

    इस पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि DERC की वर्तमान संरचना कानून के विपरीत है, क्योंकि (a) इसमें केवल 2 'प्रो-टेम' (अस्थायी) सदस्य शामिल हैं, (b) इसमें कोई अध्यक्ष नहीं है, और (c) इसमें सदस्य के रूप में कानून का जानकार कोई व्यक्ति नहीं है। याचिका में उल्लेख किया गया कि ये 'प्रो-टेम' सदस्य, एक अन्य मामले के लंबित रहने के दौरान अस्थायी व्यवस्था के तौर पर प्रस्तावित किए गए।

    इसमें इस बात को भी रेखांकित किया गया कि DERC में नियुक्तियों का यह मुद्दा, दिल्ली सरकार द्वारा उपराज्यपाल से जुड़े संवैधानिक मुद्दों को लेकर दायर की गई कई रिट याचिकाओं के समूह से ही उत्पन्न हुआ। इन याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान ही यह 'प्रो-टेम' (अस्थायी) व्यवस्था की गई, लेकिन बाद में इन याचिकाओं को वापस ले लिया गया। उन रिट याचिकाओं के निपटारे के साथ ही यह अंतरिम व्यवस्था भी समाप्त हो गई। उस समय दिल्ली सरकार ने भरोसा दिलाया था कि नियमित नियुक्तियां तेज़ी से की जाएंगी।

    याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिजली अधिनियम की धारा 142 के तहत DISCOMs के ख़िलाफ़ शिकायतें/याचिकाएं 15.07.2025 से सुनी/सूचीबद्ध नहीं की गईं। इसमें कहा गया कि न्याय और कानूनी उपचार तक पहुंच से यह इनकार, अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उपभोक्ताओं के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

    Case Title: ENERGY WATCHDOG v. GOVERNMENT OF NCT OF DELHI AND ANR., W.P.(C) No. 626/2026

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