सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में दी ज़मानत

Shahadat

26 May 2026 10:12 AM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को शराब घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में दी ज़मानत

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को ज़मानत दी। उन्हें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

    चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने दास की रिहाई का आदेश दिया। साथ ही बेंच ने यह भी साफ़ किया कि वह दास पर लगे आरोपों की मेरिट पर कोई राय नहीं दे रही है। कोर्ट ने कहा कि दास की रिहाई ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन होगी।

    सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दास 19 दिसंबर, 2025 से हिरासत में हैं और ट्रायल पूरा होने में काफ़ी समय लगने की संभावना है।

    कोर्ट ने दास पर लगे आरोपों का ज़िक्र करते हुए यह टिप्पणी की,

    "याचिकाकर्ता आबकारी विभाग में सचिव थे। बाद में उन्हें आबकारी आयुक्त के पद पर तैनात किया गया। उन पर आरोप है कि पूरे मामले पर उनका ही नियंत्रण था, और कथित अपराध को अंजाम देने के लिए एक फ़ायदेमंद नीति बनाने में उनकी भी मिलीभगत थी। इस तरह याचिकाकर्ता की भूमिका मुख्य सूत्रधार की है। उन्हें इस मामले के मुख्य सरगनाओं में से एक बताया गया है। यह आरोप भी है कि याचिकाकर्ता ने अपने सरकारी पद का घोर दुरुपयोग किया, जिससे सरकारी खजाने को बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान पहुंचा।"

    इसके साथ ही बेंच ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि इस मामले में कुल नौ आरोपी हैं। उनमें से आठ को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। कोर्ट ने पाया कि दास के संबंध में भ्रष्टाचार और PMLA, दोनों ही मामलों में जाँच पूरी हो चुकी है। चार्जशीट के साथ-साथ अभियोजन की शिकायत भी दायर की जा चुकी है।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी की,

    "हमने गवाहों की सूची और उन दस्तावेज़ों को देखा है, जिन्हें स्पेशल जज के समक्ष विचार के लिए पेश किया जाएगा। इससे यह साफ़ है कि ट्रायल पूरा होने में काफ़ी लंबा समय लगेगा।"

    हिरासत में बिताई गई अवधि, सह-आरोपियों की स्थिति और ट्रायल पूरा होने में संभावित देरी को देखते हुए कोर्ट ने दास को ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

    यह मामला कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ा है। इस घोटाले में जांच एजेंसियों ने राज्य के शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, जिसके चलते सरकारी खजाने को कथित तौर पर भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा है।

    Case : Niranjan Das v. Directorate of Enforcement | SLP(Crl) No. 6562/2026

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