सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के NCP नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी याह्या ढेबर को ज़मानत दी
Shahadat
19 March 2026 9:20 PM IST

लगभग दो साल हिरासत में बिताने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता राम अवतार जग्गी के 2003 के हत्याकांड में दोषी याह्या ढेबर को ज़मानत दी।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ढेबर की आजीवन कारावास की सज़ा निलंबित की और जुर्माना भरने तथा ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली शर्तों और नियमों के अधीन उसे रिहा करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पाया कि इसी तरह की स्थिति वाले अन्य सह-दोषियों को भी इसी तरह की राहत दी गई और उन्हें ज़मानत पर रिहा किया गया। कोर्ट ने आगे यह भी पाया कि एक संबंधित मामले में CBI की उस अपील को 3 जजों की बेंच ने स्वीकार किया, जिसमें एक आरोपी को बरी किए जाने को चुनौती दी गई और उस मामले को गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए हाईकोर्ट को वापस भेज दिया गया। इसके अलावा, वास्तविक शिकायतकर्ता द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाएँ भी हाई कोर्ट में लंबित थीं।
ऐसे में बेंच ने इस चरण पर दोषी-अपीलकर्ताओं की अपीलों पर सुनवाई करना उचित नहीं समझा। हाईकोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करते हुए बेंच ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और ढेबर की हिरासत समाप्त करने का फ़ैसला किया।
"ऐसी स्थिति में हमें यह उचित नहीं लगता कि आवेदक, याह्या ढेबर, जेल में ही रहे, जबकि इसी तरह की स्थिति वाले अन्य सह-दोषियों को सज़ा के निलंबन और उसके परिणामस्वरूप ज़मानत की राहत दी जा चुकी है। आवेदक याह्या ढेबर पर लगाई गई कारावास की सज़ा, जिसे हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया, जुर्माना राशि जमा करने पर निलंबित मानी जाएगी। आवेदक को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली उचित शर्तों और नियमों के आधार पर ज़मानत पर रिहा किया जाएगा।"
कोर्ट ने अपील की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित की और पक्षकारों से कहा कि हाई कोर्ट में लंबित मामलों का फ़ैसला हो जाने के बाद वे इस मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करवाने का अनुरोध करें। साथ ही हाईकोर्ट से भी अनुरोध किया गया कि वह अपने यहां लंबित मामलों की सुनवाई में, जहां तक संभव हो, तेज़ी लाए।
ढेबर 30.04.2024 से जेल में बंद था। उसे छत्तीसगढ़ के स्पेशल कोर्ट ने 31.05.2007 के फैसले के ज़रिए IPC की धारा 302/120B के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। हाईकोर्ट में उसकी अपील 2024 में खारिज कर दी गई, जिसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
Case Title: YAHYA DHEBAR v. STATE OF CHHATTISGARH, Crl.A. No. 4805/2024

