सुप्रीम कोर्ट ने सीमा पार मानव तस्करी के आरोपी कथित बांग्लादेशी व्यक्ति को ज़मानत दी
Shahadat
9 May 2026 10:45 AM IST

लगभग ढाई साल की हिरासत अवधि को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर बांग्लादेशी नागरिक होने का आरोप है और जो कथित तौर पर बांग्लादेश और म्यांमार से लोगों की भारत में तस्करी करने के लिए भारतीय दंड संहिता के तहत अपराधों का सामना कर रहा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। साथ ही याचिकाकर्ता-आरोपी पर कड़ी शर्तें लगाईं और ट्रायल कोर्ट से मुकदमे की सुनवाई में तेज़ी लाने का अनुरोध किया।
संक्षेप में मामला
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वह बांग्लादेशी है, जो एक ऐसे गिरोह का हिस्सा बनकर काम कर रहा है, जो बांग्लादेश और म्यांमार से लोगों की भारत में सीमा पार मानव तस्करी में शामिल है। वह NIA द्वारा दर्ज किए गए उस मामले में आरोपी है, जिसमें IPC की धारा 370(3) और 120B के तहत, साथ ही विदेशी अधिनियम की धारा 14, 14(A)(B) और 14(C) तथा पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 की धारा 3 (जिसे पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के नियम 6 के साथ पढ़ा जाए) के तहत अपराधों का आरोप है।
याचिकाकर्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें उसे ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने उससे आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जिसमें नकली पासपोर्ट आदि शामिल हैं। उसे 07.11.2023 को गिरफ्तार किया गया और तब से वह हिरासत में है। उसके सह-आरोपियों को कथित तौर पर ज़मानत मिल चुकी है।
इस पृष्ठभूमि में, खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि यद्यपि याचिकाकर्ता का मामला अन्य आरोपियों से अलग था, क्योंकि उसका कोई स्थायी पता नहीं था। फिर भी हिरासत में बिताए गए समय को देखते हुए उसे कड़ी शर्तों के अधीन ज़मानत दी जा सकती है।
तदनुसार, याचिका स्वीकार की गई और निम्नलिखित शर्तों के अधीन ज़मानत दी गई:
(1) याचिकाकर्ता NIA के स्थानीय पुलिस स्टेशन को उस पते के बारे में सूचित करेगा, जहां वह मुकदमे की सुनवाई के दौरान रहेगा। NIA को उस स्थान का सत्यापन करने और मकान मालिक, पड़ोसी आदि के बयान दर्ज करने का अधिकार होगा।
(2) वह हर हफ़्ते शनिवार को 11-12 बजे के बीच NIA को रिपोर्ट करेगा, जब तक कि बेंगलुरु में NIA का सर्वोच्च अधिकारी उसे इस शर्त से छूट न दे दे।
(3) वह मुकदमे की सुनवाई में पूरी तरह सहयोग करेगा और उसकी ओर से सुनवाई स्थगित करने का कोई अनुरोध नहीं किया जाएगा।
(4) उसका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया जाएगा।
Case Title: AMOL CHANDRA DAS @ AMOL DAS @ SUJIB Versus NATIONAL INVESTIGATION AGENCY, SLP(Crl) No. 5567/2026

