सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को उन राज्यों से संपर्क करने का निर्देश दिया जिन्होंने हज कमेटियों का गठन नहीं किया

Shahadat

28 March 2023 4:53 AM GMT

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को उन राज्यों से संपर्क करने का निर्देश दिया जिन्होंने हज कमेटियों का गठन नहीं किया

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को उन राज्यों से संपर्क करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अभी तक अपने राज्यों में हज कमेटियों का गठन नहीं किया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की खंडपीठ हज कमेटी एक्ट, 2002 की धारा 3 सपठित धारा 4 और धारा 17 के अनुसार, राज्य हज कमेटियों के तहत निर्धारित केंद्रीय हज कमेटी के गठन से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) केएम नटराज ने अदालत को सूचित किया कि केंद्रीय हज कमेटी पहले ही गठित की जा चुकी है और उनके निर्देशों के अनुसार, ओडिशा एकमात्र राज्य है, जिसमें अभी तक कोई राज्य हज कमेटी नहीं है।

    हालांकि इस मामले में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भले ही केंद्रीय हज कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन आज तक कमेटी में रिक्त पद खाली हैं। इस पर एएसजी नटराज ने कहा कि वह इस पर गौर करेंगे और इसके संबंध में उपचारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने आदेश लिखवाते हुए कहा,

    "एएसजी नटराज का कहना है कि केंद्रीय हज कमेटी का गठन किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि कमेटी में रिक्तियां हैं। एएसजी का कहना है कि वह इस पर गौर करेंगे और उपचारात्मक कार्रवाई तेजी से की जाएगी। राज्य कमेटियों के संबंध में एएसजी का कहना है कि केवल उड़ीसा में हज कमेटी नहीं है। इस मामले को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा देखा जा सकता है, जो ऐसे राज्यों के साथ जुड़ेंगे, जिन्होंने अभी तक हज कमेटी का गठन नहीं किया है।"

    अगस्त, 2022 में कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि अगर उनके राज्यों में हज कमेटियों का गठन किया जाता है तो वे हलफनामे के माध्यम से कोर्ट को सूचित करें। अदालत ने राज्यों को इस प्रकार गठित हज कमेटियों के कमेटी मेंबर्स के नाम निर्दिष्ट करने का भी निर्देश दिया है। बाद में अदालत ने हज कमेटियों के गठन के लिए चार राज्यों को समय दिया था।

    इस संबंध में दायर याचिका में तर्क दिया गया कि केंद्र और प्रतिवादी राज्य हज समिति अधिनियम, 2002 के सख्त प्रावधान का पालन करने में विफल रहे हैं और उक्त क़ानून के तहत कमेटियों की नियुक्ति करने में विफल रहे हैं।

    पहले की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि भारत में 2019 से सेंट्रल हज कमेटी नहीं है। साथ ही अक्टूबर, 2021 तक 19 में से केवल 1 राज्यों में पूरी तरह से ऑपरेशनल स्टेट हज कमेटी है, जबकि अन्य सभी राज्य या तो नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से कार्रवाई का इंतज़ार कर रहे हैं या 3 साल से अधिक से कमेटी नहीं है।

    केस टाइटल: हाफिज नौशाद अहमद आज़मी बनाम भारत संघ और अन्य। WP(C) नंबर 1229/2021 जनहित याचिका

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