सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स को एससी में पेंडिंग मामलों से जुड़े ट्रिब्यूनल के मामलों की सुनवाई करने से रोका
Shahadat
10 Feb 2026 7:55 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी) को हाई कोर्ट्स को ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्तियों और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने से रोक दिया, चाहे वे राज्य या केंद्र के कानूनों के तहत हों, जो सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी के अनुरोध पर कोर्ट ने केरल और कलकत्ता हाई कोर्ट्स में ट्रिब्यूनल नियुक्तियों से संबंधित पेंडिंग याचिकाओं को भी अपने पास ट्रांसफर किया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कलकत्ता हाईकोर्ट के 4 फरवरी के आदेश के खिलाफ आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसने CAT सर्किट बेंच, पोर्ट ब्लेयर के कामकाज पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह आदेश इस आधार पर दिया कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को रद्द करने के बाद CAT सदस्य पद पर नहीं रह सकते।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर यह था कि सदस्यों को 4 साल के कार्यकाल के बजाय 5 साल का कार्यकाल मिलना चाहिए।
CJI ने कहा,
"तो इसका मतलब है कि सदस्यों को काम जारी रखना चाहिए।"
AG ने कहा,
"यह इसे देखने का व्यावहारिक तरीका था।"
बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई और CAT चेयरपर्सन को पोर्ट ब्लेयर में सर्किट बेंच को तुरंत नियुक्त करने का निर्देश दिया ताकि वह मामलों की सुनवाई रोज़ाना कर सके।
इसके बाद AG ने मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने का अनुरोध करते हुए कहा,
"हमें पूरे भारत में समस्याएं होने वाली हैं।"
इसके बाद बेंच ने आदेश दिया:
"चूंकि ट्रिब्यूनल के सुधारों से संबंधित मामला इस कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए हम कलकत्ता हाईकोर्ट सर्किट बेंच, पोर्ट ब्लेयर के समक्ष लंबित MAT 5/2026 और केरल हाईकोर्ट के समक्ष लंबित W.P(c) 46504/2025 को इस कोर्ट में ट्रांसफर करना उचित समझते हैं। हम सभी हाई कोर्ट्स से अनुरोध करते हैं कि वे राष्ट्रीय/राज्य ट्रिब्यूनल के गठन, निरंतरता या संरचना के संबंध में उन याचिकाओं पर विचार न करें, जो इस कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं।"
Case : CENTRAL ADMINISTRATIVE TRIBUNAL BAR ASSOCIATION KOLKATA Vs UNION OF INDIA | W.P.(C) No. 662/2022

