बच्चों के मन से डर निकालने के लिए फ़ैमिली कोर्ट में काले चोगे पहनना बंद करें जज और वकील: CJI सूर्यकांत

Shahadat

18 March 2026 8:46 AM IST

  • बच्चों के मन से डर निकालने के लिए फ़ैमिली कोर्ट में काले चोगे पहनना बंद करें जज और वकील: CJI सूर्यकांत

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने हाल ही में सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट में जज और वकील अपने पारंपरिक काले चोगे पहनना छोड़ दें, ताकि बच्चों को डर न लगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट का नाम बदलकर 'फ़ैमिली रिज़ॉल्यूशन सेंटर' (पारिवारिक समाधान केंद्र) कर दिया जाए।

    नई दिल्ली के रोहिणी में नए फ़ैमिली कोर्ट कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखने के समारोह में बोलते हुए CJI ने पूछा,

    "क्या फ़ैमिली कोर्ट में ये काले चोगे होने चाहिए? क्या इससे बच्चे के मन में डर पैदा नहीं होगा?"

    चीफ जस्टिस ने प्रस्ताव दिया कि फ़ैमिली कोर्ट में जज और वकील अपने काले चोगे पहनना छोड़ दें, क्योंकि "यह पूरा माहौल बच्चों के मन में डर का माहौल (Fear Psychosis) पैदा करता है।"

    फ़ैमिली कोर्ट की खास प्रकृति पर ज़ोर देते हुए CJI ने कहा कि ये सिर्फ़ फ़ैसले सुनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि ऐसे मंच हैं, जिनका मकसद इंसानी रिश्तों को सुधारना है। इसी संदर्भ में, उन्होंने सुझाव दिया कि "फ़ैमिली रिज़ॉल्यूशन सेंटर" शायद ज़्यादा सही नाम होगा।

    उन्होंने कहा,

    "हम इन्हें 'कोर्ट' क्यों कहें? क्या हम इन्हें 'फ़ैमिली रिज़ॉल्यूशन सेंटर' नहीं कह सकते?"

    CJI ने इस बात पर ज़ोर दिया कि फ़ैमिली कोर्ट में आने वाले विवादों के गहरे भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक नतीजे होते हैं, जो अक्सर सीधे कानूनी मुद्दों से कहीं आगे तक जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कोर्ट को इंसानी भावनाओं और मूल्यों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।

    इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के जजों के साथ-साथ कई गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए, जिनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी थीं।

    दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने पारिवारिक विवादों को तेज़ी से निपटाने की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया और बढ़ते लंबित मामलों से निपटने के लिए और ज़्यादा फ़ैमिली कोर्ट बनाने की अपील की।

    सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मनमोहन ने न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में बुनियादी ढाँचे की कमियों को एक बड़ी रुकावट बताया।

    वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस संजीव नरूला ने जजों के काम करने के माहौल पर ध्यान केंद्रित किया और मामलों को निपटाने के बढ़ते दबाव के अनदेखे नुकसानों के प्रति आगाह किया। उन्होंने बताया कि मामलों की लंबी सूची, काम के लंबे घंटे और लगातार जनता की नज़र में रहने का बोझ जजों पर बहुत ज़्यादा मानसिक दबाव डालता है।

    दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस वी. कामेश्वर राव ने भी न्यायिक बुनियादी ढांचे और व्यवस्थाओं को मज़बूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि देरी को कम करने और काम करने के तरीके को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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