जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने की NALSAR स्टूडेंट्स की तारीफ़, कहा- वे होनहार, निडर और बहादुर

  • जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने की NALSAR स्टूडेंट्स की तारीफ़, कहा- वे होनहार, निडर और बहादुर

    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ स्टूडेंट्स की तारीफ़ करते हुए उन्हें "होनहार, निडर और बहादुर" बताया। यह तारीफ़ ऐसे समय में की गई, जब यूनिवर्सिटी के पास होने वाले बैच पर बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने एनरोलमेंट (पंजीकरण) पर पूरी तरह रोक लगाई थी (जिसे बाद में हटा लिया गया)। यह रोक इसलिए लगाई गई थी, क्योंकि स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत के प्रस्तावित शामिल होने का विरोध किया।

    19वीं NALSAR जस्टिस बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 के समापन समारोह में भाषण देते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि स्टूडेंट्स ने देश और दुनिया को दिखाया कि एक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स, और खासकर लॉ स्टूडेंट्स, कैसा होना चाहिए।

    उन्होंने कहा,

    "अपनी बात खत्म करने से पहले, NALSAR के होनहार स्टूडेंट्स के बारे में एक आखिरी बात। आपने देश और दुनिया को दिखाया कि एक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स, और वह भी लॉ स्टूडेंट, कैसा होना चाहिए। आप होनहार हैं; आप निडर हैं; और आप बहादुर हैं।"

    अगस्त में NALSAR के पास होने वाले बैच के कुछ स्टूडेंट्स ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर CJI सूर्य कांत को बुलाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। खबरों के मुताबिक, यह आपत्ति दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़ी अदालती कार्यवाही के दौरान CJI की टिप्पणियों को लेकर थी।

    इस अभियान के कारण BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने 13 अगस्त को राज्य बार काउंसिलों को निर्देश जारी किया कि वह NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट का एनरोलमेंट तब तक न करें जब तक कि आगे कोई आदेश न मिले।

    उन्होंने यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर, प्रोफेसर श्रीकृष्ण देवा राव को भी निर्देश दिया कि वह उन स्टूडेंट्स, फैकल्टी सदस्यों, रिसर्च स्कॉलर्स, पूर्व स्टूडेंट्स और अन्य लोगों की पहचान करके रिपोर्ट सौंपें, जो CJI के शामिल होने के खिलाफ़ अभियान आयोजित करने में कथित तौर पर शामिल थे। BCI चेयरमैन ने स्टूडेंट्स के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि फैकल्टी सदस्य उन्हें गुमराह कर रहे थे।

    इसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने BCI के निर्देश के अनुसार तुरंत जांच शुरू नहीं की। प्रोफ़ेसर देवा राव ने कहा कि यूनिवर्सिटी BCI के निर्देशों की कानूनी वैधता की जांच करेगी। इस मामले को अपनी एग्जीक्यूटिव काउंसिल (सबसे बड़ी फ़ैसला लेने वाली संस्था) के सामने रखेगी, ताकि यह तय किया जा सके कि प्रस्तावित जांच यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत हो सकती है या नहीं।

    BCI चेयरमैन के आदेश जारी करने के कुछ घंटों बाद ही, काउंसिल ने NALSAR के पास होने वाले स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा ली। इसके बाद देर रात पोस्ट में BCI चेयरमैन ने घोषणा की कि उस बैच के ख़िलाफ़ पूरी कार्रवाई रद्द कर दी गई।

    यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा और BCI चेयरमैन के निर्देशों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। कोर्ट ने 14 अगस्त को दखल देते हुए निर्देश दिया कि इस कैंपेन के सिलसिले में NALSAR के स्टूडेंट्स या फैकल्टी सदस्यों के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

    3 सितंबर को कोर्ट ने कहा कि BCI के पास लॉ स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और NALSAR के ग्रेजुएट्स के बारे में उसके संचार को कानूनी अधिकार के बिना घोषित किया।

    इस पृष्ठभूमि में, जस्टिस भुइयां द्वारा स्टूडेंट्स की सार्वजनिक तारीफ़ अहम हो जाती है। हालांकि उन्होंने अपने भाषण के दौरान विवाद या BCI की कार्रवाइयों का साफ़ तौर पर ज़िक्र नहीं किया।

    जस्टिस भुइयां ने यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों की भी तारीफ़ की और कहा कि उन्होंने अपनी ड्यूटी बहुत अच्छे से निभाई और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों से अपेक्षित ज़िम्मेदारियों को पूरा किया।

    उन्होंने ख़ास तौर पर वाइस-चांसलर प्रोफ़ेसर श्रीकृष्णा देवा राव की तारीफ़ की और कहा कि उन्होंने यूनिवर्सिटी का नेतृत्व बहुत अच्छे से किया।

    उन्होंने कहा,

    "फैकल्टी सदस्यों से कहूंगा कि आपने अपनी ड्यूटी बहुत अच्छे से निभाई; आपने वही किया, जो एक यूनिवर्सिटी शिक्षक से उम्मीद की जाती है। वाइस-चांसलर को भी नहीं भूलना चाहिए। मेरे चांसलर रहने के दौरान ही प्रोफ़ेसर राव को वाइस-चांसलर नियुक्त किया गया। मुझे कहना होगा कि उन्होंने यूनिवर्सिटी का नेतृत्व बहुत अच्छे से किया। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को निराश नहीं किया।"

    बता दें, जस्टिस भुइयां ने पहले जून 2022 से जुलाई 2023 तक तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान NALSAR के पदेन चांसलर के रूप में काम किया है।

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