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कानून मंत्रालय में अपना प्रतिनिधित्व दें: सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया

LiveLaw News Network
9 April 2021 11:07 AM GMT
कानून मंत्रालय में अपना प्रतिनिधित्व दें: सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार किया
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश में वकीलों की सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बनाने के लिए निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और कानून मंत्रालय में अपना प्रतिनिधित्व दाखिल करने के लिए कहा।

सीजेआई बोबडे, न्यायमूर्ति बोपन्ना और न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन की तीन-न्यायाधीश पीठ ने याचिकाकर्ता को एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने के बारे में याचिका वापस लेने और कानून मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।

तेलंगाना के वकील दंपति एडवोकेट गट्टू वामन राव और उनकी पत्नी पीवी नागमणि की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद इस एक्ट की मांग की जा रही है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के लिए अधिवक्ता साई दीपक उपस्थित हुए।

सीजेआई ने कहा,

"कानून मंत्रालय में अपना प्रतिनिधित्व दाखिल करें। हम कुछ नहीं कर सकते।"

वर्तमान दलील में याचिकाकर्ता ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने के लिए विधि मंत्रालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है। यह भी तर्क दिया गया है कि उत्तरदाताओं ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,19 1 (जी) और 21 और एडवोकेट एक्ट की धारा 30 के तहत याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

दलील में कहा गया कि वर्तमान में भारत में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कोई एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट नहीं है और पहले से अधिवक्ताओं द्वारा की गई देशव्यापी हड़ताल के माध्यम से उनके संरक्षण के लिए एक कानून की मांग की जा रही है।

इसके अलावा, दलील में कहा गया है कि वर्तमान में भी तेलंगाना के वकील दंपति एडवोकेट्स गट्टू वामन राव और उनकी पत्नी पीवी नागमणि की दिन के उजाले में क्रूर हत्या के कारण अधिवक्ता एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे हैं।

दलील दी गई कि हाल के दिनों में अधिवक्ताओं के खिलाफ हत्या और हमले जैसी घटनाएं बढ़ी हैं और इस तरह के लगातार हमलों का एक मुख्य कारण एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की कमी है।

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