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लॉ स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की

LiveLaw News Network
13 Dec 2021 4:31 PM GMT
लॉ स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की
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लॉ के दो स्टूडेंट ने आरटीआई आवेदनों और प्रथम अपील की ई-फाइलिंग के लिए सुप्रीम कोर्ट के लिए एक ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट के लिए एक ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल की मांग करते हुए इन स्टूडेंट्स ने एक जनहित याचिका दायर की। इसमें सुप्रीम कोर्ट सहित प्रतिवादियों को सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के माध्यम से समयबद्ध तरीके से एक ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

अधिवक्ता नेहा राठी के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एच) के तहत एक "सार्वजनिक प्राधिकरण" होने के बावजूद, आरटीआई अधिनियम के लागू होने के बाद से ऐसा कोई पोर्टल नहीं बनाया है।

याचिका में कहा गया कि भारत सरकार पहले से ही अपना ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल (www.rtionline.gov.in) सफलतापूर्वक चला रही है। इसमें सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है। इससे लोगों को सूचना तक आसानी से और तेजी से पहुंच मिलती है।

याचिकाकर्ताओं आकृति अग्रवाल और लक्ष्य पुरोहित ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति ने पहले से ही याचिकाओं की ई-फाइलिंग के लिए एक बेहतर सिस्टम प्रदान किया है, लेकिन आरटीआई आवेदनों की ई-फाइलिंग के संबंध में ऐसा नहीं है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने इस तरह का एक पोर्टल बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के संबंधित अधिकारियों को पहले ही लिखा है, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। इससे देरी हो रही है और त्वरित सूचना और न्याय तक पहुंच से इनकार किया जा रहा है।

याचिका में कहा गया,

"वर्तमान COVID-19 महामारी में आरटीआई आवेदन दाखिल करने के लिए फिजिकल कोर्ट और पोस्ट ऑफिस तक पहुँचने के मामले में पूरे देश को विवश किया गया है। यह सूचना तक पहुंचने और न्याय तक पहुंच में एक गंभीर बाधा के रूप में कार्य कर रहा है और यह भारत के संविधान के क्रमशः अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत नागरिकों के मौलिक अधिकार के उल्लंघन की ओर जाता है।"

याचिका में प्रवासी कानूनी प्रकोष्ठ बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है। यह कहते हुए कि न्यायालय ने राज्य सरकारों के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल के कानूनी आदेश को मान्यता दी है और साथ ही दिनांक 26.08.2019 को नोटिस भी जारी किया है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल द्वारा दिवंगत न्यायमूर्ति शांतनगौदर को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में एक सभा को संबोधित करते हुए अदालतों के वादियों के अनुकूल होने पर भी जोर दिया था।

केस का शीर्षक: आकृति अग्रवाल और अन्य बनाम सुप्रीम कोर्ट और अन्य

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