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'न्याय को हमेशा काले गाउन और विस्तृत तर्कों की आवश्यकता नहीं होती, भविष्य मध्यस्थता का है': CJI रमना

LiveLaw News Network
23 July 2021 4:47 AM GMT
न्याय को हमेशा काले गाउन और विस्तृत तर्कों की आवश्यकता नहीं होती, भविष्य मध्यस्थता का है: CJI रमना
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भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय आभासी मध्यस्थता ग्रीष्मकालीन स्कूल, 2021 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने विवाद समाधान में मध्यस्थता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने सशक्तिकरण और समाज में बदलाव लाने के एक उपकरण के रूप में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निवारण-मिडिएडर्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में त्रिनिदाद और टोबैगो और ब्रेन स्पीयर्स की अपील न्यायालय के जज और कॉमनवेल्‍थ लॉयर्स एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष ज‌स्टिस ऑफ अपील वेशिस्ट वी कोकराम भी मौजूद थे।

सीजेआई रमना ने कहा कि मध्यस्‍थता मौजूदा दौर में संघर्ष समाधान का सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है, भविष्य में जिसकी प्रासंगिकता बढ़ती जाएगी। उन्होंने भारत-सिंगापुर मध्यस्थता शिखर सम्मेलन में दिए अपने भाषण को संदर्भित किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के आगमन से पहले भारत में आमतौर पर मध्यस्थता का चलन था।

उन्होंने कहा "अंग्रेजों ने न केवल आधुनिक भारतीय न्यायिक प्रणाली का ढांचा बनाया, बल्कि उन्होंने ये मिथक भी गढ़ा कि न्याय और विवाद समाधान के लिए काले कोट, गाउन और दलीलों की आवश्यकता होती है। यह ऐसे मिथकों और विचारों को दूर करने का समय है। वास्तविकता भारत में अधिकांश मामलों में वादी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से पीड़ित हैं। उन्हें विवाद समाधान का एक त्वरित, सस्ता और सुविधाजनक तरीका चा‌‌हिए। "

उन्होंने कहा कि विवाद समाधान के साधन के रूप में मध्यस्थता लागत प्रभावी, समय की बचत कराने में सक्षम, और पार्टियों के लिए सुविधाजनक है। उन्होंने कहा, हालांकि, मध्यस्थता की तुलना में पारंपरिक मुकदमों में हमेश एक पक्ष असंतुष्ट रह जाता है, जिसका नतीजा यह होता है कि सुप्रीम कोर्ट की अपील होती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है। उन्होंने कहा कि "विजेता ही सब कुछ लेगा" यह दृष्टिकोण सिस्टम को प्रभावित करता है।

उन्होंने इस समस्या के समाधान के रूप में मध्यस्थता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह एक प्रतिकूल दृष्टिकोण या स्थिति से आगे बढ़ने के एक बदलाव को दर्शाता है और सभी पार्टियों के लिए बेहतर परिणामों पर केंद्र‌ित है।

मध्यस्थों का निरंतर और गुणवत्ता प्रशिक्षण

भारत में मध्यस्थता में सुधार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर, सीजेआई रमना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ने विभिन्न न्यायिक घोषणाओं के माध्यम से मध्यस्थता को मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप देश में अदालत के निर्माण और प्रसार में मध्यस्थता को संलग्न किया गया।

उन्होंने 2005 में स्थापित सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता और समझौता परियोजना समिति के प्रयासों की सराहना की, जो भारत में मध्यस्थों के प्रशिक्षण का अभिन्न अंग है। उन्होंने मध्यस्थों के प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया और संघर्ष समाधान के दौरान मध्यस्थों की कठिनाइयों पर भी रोशनी डाली।

उन्होंने कहा कि जब मध्यस्थ अच्छी तरह से प्रशिक्षित होता है और मुद्दे को समझने के लिए सुसज्जित होता है तो मुद्दे हल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार दुनिया भर में सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने के लिए लगातार अद्यतन और संशोधित किया जाना चाहिए।

लॉ स्कूलों और पाठ्यक्रम की भूमिका

उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वैकल्पिक विवाद समाधान पर एक कोर्स अनिवार्य किया है, हालांकि इस मामले में देश में कानून स्कूलों को अधिक ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

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