चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: माइनिंग माफिया पर सख्त कार्रवाई और नजरबंदी के निर्देश

Praveen Mishra

17 April 2026 5:09 PM IST

  • चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: माइनिंग माफिया पर सख्त कार्रवाई और नजरबंदी के निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर स्वत: संज्ञान मामले में सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को तत्काल प्रभाव से प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकारें अवैध खनन पर रोक लगाने में विफल रहती हैं, तो अदालत पूर्ण प्रतिबंध, भारी जुर्माना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती जैसे कड़े कदम उठा सकती है।

    कोर्ट ने राज्यों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अभयारण्य में हो रहे नुकसान को रोकने में प्रशासन विफल रहा है, जबकि कानून और ढांचा मौजूद है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों का रवैया लापरवाह प्रतीत होता है।

    पीठ ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कई निर्देश जारी किए, जिनमें संवेदनशील क्षेत्रों में हाई-रिजोल्यूशन CCTV कैमरे लगाना, उनकी लाइव मॉनिटरिंग पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नियंत्रण में रखना, और किसी भी अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना शामिल है।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अवैध खनन में शामिल वाहनों और मशीनों को तुरंत जब्त किया जाए और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, पर्यावरण क्षति के लिए मुआवजा वसूला जाए और संयुक्त गश्ती दलों का गठन किया जाए।

    मध्य प्रदेश के मुरैना और राजस्थान के धौलपुर जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खनन से जुड़े सभी वाहनों और मशीनों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य करने का भी आदेश दिया गया है, ताकि उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी और अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यों को अवैध खनन के खिलाफ सख्त कानूनों, जब्ती और निरोधात्मक कार्रवाई का उपयोग करना चाहिए, ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    मामले की अगली सुनवाई तक राज्यों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की योजना और उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाएगी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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