'कट्टर नक्सली, गुलदस्ते से स्वागत नहीं हो सकता': सुप्रीम कोर्ट ने मुठभेड़ में मारे गए माओवादी की मौत की जांच की मांग वाली याचिका खारिज की

Shahadat

23 May 2026 8:31 PM IST

  • कट्टर नक्सली, गुलदस्ते से स्वागत नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट ने मुठभेड़ में मारे गए माओवादी की मौत की जांच की मांग वाली याचिका खारिज की

    22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज की, जिसमें हाईकोर्ट ने कथा रामचंद्र रेड्डी की मौत की दोबारा पोस्टमॉर्टम और जांच का आदेश देने से इनकार किया था। कथा रामचंद्र रेड्डी एक माओवादी कमांडर थे, जो पिछले साल सितंबर में छत्तीसगढ़ में एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्रन शर्मा की बेंच ने माओवादी नेता के बेटे द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई की। यह याचिका हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई, जिसमें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा जांच कराने से इनकार किया गया था।

    शुरुआत में ही, सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने दलील दी कि रेड्डी के शरीर पर कई चोटें पाई गई थीं। उन्होंने दावा किया कि यह हिरासत में यातना (कस्टोडियल टॉर्चर) का मामला है।

    जस्टिस दत्ता ने पूछा,

    "क्या ऐसा है कि मुठभेड़ सिर्फ गोलियों से ही होनी चाहिए? हाथापाई भी हो सकती है। अब, हाथापाई के दौरान अगर मृतक के शरीर पर कोई चोट लग जाती है तो आप यह निष्कर्ष कैसे निकालते हैं कि यह हिरासत में हुई मौत है?"

    गोंसाल्वेस ने दलील दी कि शरीर पर और भी कई चोटें हैं, जिनसे पता चलता है कि उन्हें यातना दी गई थी।

    जस्टिस दत्ता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि इस बात की भी संभावना है कि वे घाव राइफल के बोल्ट से लगे हों।

    जस्टिस शर्मा ने भी इसमें जोड़ते हुए कहा कि जंगल में लड़ाई (जंगल वॉरफेयर) एक बहुत मुश्किल काम है। उन्होंने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता के पिता एक "कट्टर नक्सली" थे, जिनके पास से ऑपरेशन के दौरान अत्याधुनिक हथियार बरामद किए गए: "ऐसे व्यक्ति का स्वागत गुलदस्ते से नहीं किया जा सकता।"

    जस्टिस दत्ता, जिनसे जस्टिस शर्मा भी सहमत थे, उन्होंने टिप्पणी की कि नक्सल विरोधी अभियानों में लगी सुरक्षा बलें बेहद खतरनाक परिस्थितियों में काम करती हैं, जहां उनकी "जान को खतरा" होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह मामला किसी आम ग्रामीण का होता तो कोर्ट इस पर विचार करता।

    कोर्ट ने इस अपील को खारिज किया।

    उल्लेखनीय है कि पिछले साल कोर्ट ने निर्देश दिया था कि रेड्डी के शव को तब तक मुर्दाघर में सुरक्षित रखा जाए, जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट उनके बेटे द्वारा मुठभेड़ के खिलाफ दायर रिट याचिका पर फैसला नहीं सुना देता। उनके बेटे राजा चंद्र ने आरोप लगाया था कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि हाईकोर्ट ने पूजा की छुट्टियों के लिए बंद होने से पहले उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया था। यह मुठभेड़ 22 सितंबर, 2025 को हुई थी, जब याचिकाकर्ता के पिता और कादरी सत्यनारायण रेड्डी नामक अन्य व्यक्ति छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ माओवाद-विरोधी अभियानों के दौरान हुई एक मुठभेड़ में मारे गए थे।

    इसके बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका खारिज की, जिसके विरुद्ध चंद्र ने अपील दायर की थी।

    Case Details: RAJA CHANDRA Vs STATE OF CHHATTISGARH| Diary No. 61163/2025

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