Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

फैमिली कोर्ट IPC के तहत आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर याचिका में पारित 'गलत आदेश' को सही किया

LiveLaw News Network
13 Aug 2021 6:11 AM GMT
फैमिली कोर्ट IPC के तहत आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर याचिका में पारित गलत आदेश को सही किया
x

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फैमिली कोर्ट भारतीय दंड संहिता के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दर्ज आपराधिक शिकायत का निस्तारण नहीं सकती है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक ट्रांसफर याचिका में पारित पहले के 'गलत' आदेश को संशोधित करते हुए की है।

अदालत ने इस साल की शुरुआत में एक ट्रांसफर याचिका को 'जैसी प्रार्थना की थी' को अनुमति दी थी। हालांकि उक्त प्रार्थना में न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ठाणे, महाराष्ट्र से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी की धारा 498-ए सहित) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज आपराधिक मामले को फैमिली कोर्ट, वडोदरा, गुजरात में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

फैमिली जज, वडोदरा, गुजरात ने फाइलें मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को एक पत्र लिखा और इस गलती को उनके संज्ञान में लाया। इस प्रकार मामले को फिर से 'विविध आवेदन' के रूप में न्यायालय के समक्ष रखा गया।

जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम ने कहा, "हालांकि .. प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि यह याचिकाकर्ता की अपनी गढंत है और याचिकाकर्ता ने ट्रांसफर याचिका में गलत प्रार्थना की है, मुझे नहीं लगता कि ट्रांसफर याचिका में पारित आदेश के ऑपरेटिव हिस्से को अनुमति दी जा सकती है। फैमिली कोर्ट, वास्तव में, आईपीसी के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दर्ज आपराधिक शिकायत को निस्तार‌ित नहीं कर सकता है। कोर्ट के एक गलत आदेश को इस आधार पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि पार्टियों में से एक ने इसके लिए प्रार्थना की है। "

अदालत ने तब वड़ोदरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा निर्देशित आपराधिक कार्यवाही को वडोदरा, गुजरात में एक सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने के निर्देश के साथ पहले के आदेश को संशोधित किया। कोर्ट ने कहा कि अगर फैमिली कोर्ट, वडोदरा को ट्रांसफर केस की फाइल पहले ही मिल चुकी है, तो उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सक्षम कोर्ट को आवंटित करने के लिए भेजा जाएगा।

यह है कानून

फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 7 के अनुसार, फैमिली कोर्ट किसी भी अधीनस्थ सिविल कोर्ट के किसी भी जिला अदालत द्वारा किसी भी कानून के तहत निम्नलिखित मुकदमों और कार्यवाही के संबंध में प्रयोग करने योग्य अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है।

-विवाह की अशक्तता की डिक्री के लिए विवाह के पक्षकारों के बीच एक मुकदमा या कार्यवाही (विवाह को शून्य घोषित करना या, जैसा भी मामला हो, विवाह को रद्द करना) या वैवाहिक अधिकारों की बहाली या न्यायिक अलगाव या विवाह का विघटन;

-विवाह की वैधता या किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति के बारे में घोषणा के लिए एक मुकदमा या कार्यवाही;

-पार्टियों या उनमें से किसी एक की संपत्ति के संबंध में विवाह के लिए पार्टियों के बीच एक मुकदमा या कार्यवाही;

-वैवाहिक संबंध से उत्पन्न परिस्थितियों में आदेश या निषेधाज्ञा के लिए एक मुकदमा या कार्यवाही;

-किसी व्यक्ति की वैधता के बारे में घोषणा के लिए वाद या कार्यवाही;

-भरणपोषण के लिए एक मुकदमा या कार्यवाही;

-व्यक्ति की गॉर्जियनशिप या कस्टडी या किसी नाबालिग तक पहुंच के संबंध में एक मुकदमा या कार्यवाही।

यह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973(1974 का 2) के अध्याय IX (पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरणपोषण के आदेश से संबंधित) के तहत प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा प्रयोग किए जाने वाले क्षेत्राधिकार का भी प्रयोग कर सकता है; और ऐसा अन्य ‌क्षेत्राधिकार, जो किसी अन्य अधिनियम द्वारा उसे प्रदान की जा सकती है।

आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

Next Story