“हैरान करने वाला: पढ़े-लिखे लोग भी 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों का शिकार हो रहे हैं” — CJI सूर्यकांत
Praveen Mishra
20 April 2026 2:05 PM IST

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) घोटालों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे साइबर अपराधों का शिकार हो रहे हैं, जहां ठग खुद को पुलिस अधिकारी या जज बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों से पैसे वसूलते हैं। सुनवाई के दौरान CJI ने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि उनके संज्ञान में आई एक महिला, जिन्हें वह आधिकारिक रूप से जानते हैं, इस तरह के घोटाले में अपनी पूरी रिटायरमेंट बचत गंवा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “वह रो रही थीं, उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी खो दी।”
यह टिप्पणी उस समय आई जब भारत के अटॉर्नी जनरल आर वी वेंकटरमणी ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान (suo motu) मामले में स्थगन की मांग की और बताया कि इस संबंध में विभिन्न विभागों के बीच बैठकें चल रही हैं। कोर्ट ने पिछले वर्ष इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों को जांच के लिए CBI को ट्रांसफर किया था। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गृह मंत्रालय ने एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया, जिसने ऐसे अपराधों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का प्रस्ताव भी दिया है।
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एन एस नप्पिनाई, जो इस मामले में एमिकस क्यूरी हैं, ने सुझाव दिया कि इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को “किल-स्विच” जैसी तकनीक विकसित करनी चाहिए, जिससे संदिग्ध लेनदेन को तुरंत रोका जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर डर और दबाव में आकर सामान्य निर्णय नहीं ले पाते, इसलिए तकनीकी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। इससे पहले कोर्ट ने बैंकों से भी असामान्य बड़े लेनदेन पर ग्राहकों को अलर्ट करने की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई थी।
अदालत को पहले बताया गया था कि इस तरह के डिजिटल अरेस्ट घोटालों के जरिए करीब ₹3000 करोड़ की ठगी हो चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।

