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केंद्र विभिन्न ट्रिब्यूनल में कर्मियों के आवंटन के लिए अखिल भारतीय ट्रिब्यूनल सर्विस बनाने पर विचार कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
1 Dec 2021 11:18 AM GMT
केंद्र विभिन्न ट्रिब्यूनल में कर्मियों के आवंटन के लिए अखिल भारतीय ट्रिब्यूनल सर्विस बनाने पर विचार कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया को मौखिक रूप से कहा कि जहां तक ​​ट्रिब्यूनल में प्रशासनिक कार्य का संबंध है, यह एनसीडीआरसी, एनसीएलटी, डीआरटी जैसे विभिन्न ट्रिब्यूनल और अन्य केंद्रीय कानून के तहत व्यक्तियों के आवंटन के लिए एक अंब्रेला सर्विस के माध्यम से, यह यूके की हर मेजेस्टीज ट्रिब्यूनल सर्विस की तर्ज पर एक अखिल भारतीय ट्रिब्यूनल सेवा बनाने पर विचार कर सकता है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, ज‌स्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रमनाथ की पीठ इम्तियाज अहमद बनाम यूपी राज्य मामले की सुनवाई कर रही थी, और मुख्य रूप से देश भर में राज्य और जिला स्तर पर न्यायिक बुनियादी ढांचे और जजों की संख्या के मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रही थी।

केंद्र की ओर से पेश एएसजी केएम नटराज ने कहा,

"रजिस्ट्रारों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के उद्देश्य के लिए एक अलग कैडर बनाने का सुझाव हो सकता है क्योंकि ज्यादातर न्यायिक अधिकारी रजिस्ट्रार के रूप में और कानूनी सेवा प्राधिकरणों आदि के लिए तैनात हैं। यदि हम अलग-अलग प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले अलग-अलग प्रशासनिक अधिकारी बना सकते हैं, तो हम न्यायिक कार्य के लिए न्यायिक अधिकारियों का उपयोग कर सकते हैं।"

इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,

"यह एक हद तक एक मुद्दा है। लेकिन ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां आपको न्यायिक अधिकारी की आवश्यकता है। एक दृष्टिकोण हो सकता है कि रजिस्ट्रार जनरल को न्यायिक अधिकारी क्यों होना चाहिए और क्या आपके पास एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं हो सकता है। लेकिन वह बहुत कठिन है। हमें एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो कानून में पूरी तरह से वाकिफ हो। हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल के पद को सभी स्तरों पर जिला न्यायपालिका से निपटना पड़ता है- भर्ती की देखरेख; अनुशासन; फिर गोपनीयता है, रजिस्ट्रार ( सतर्कता) जो एक न्यायिक अधिकारी है। आपके पास एक रजिस्ट्रार (न्यायिक) नहीं हो सकता है जो किसी अन्य कैडर से आता है... न्यायिक अकादमियों के लिए, आपके पास अधिमानतः एक जज होना चाहिए।"

जज ने आगे कहा,

"लेकिन यह ट्रिब्यूनल सिस्टम की निरंतर मांगों में से एक है। ट्रिब्यूनल, उदाहरण के लिए, एनसीडीआरसी का अपना कोई कैडर नहीं है या एससीडीआरसी। वेड एंड मिजरमेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी और पूरे देश से आवंटित किए जाते हैं। संस्थान के प्रमुख जजों का उन पर कोई अनुशासनात्मक नियंत्रण नहीं होता है। वे केवल उन्हें अपने विभाग में प्रत्यावर्तित करने के लिए कह सकते हैं, और कुछ नहीं। तो यह आपके लिए है कि एक अखिल भारतीय न्यायाधिकरण प्रशासनिक सेवा का गठन किए जाए। यूके में यह है। इसे हर मैजेस्टी ट्रिब्यूनल सर्विस कहा जाता है। ताकि आपके पास एक अंब्रेला सर्विस हो, जहां लोगों को विभिन्न ट्रिब्यूनल-एनसीडीआरसी, एनसीएलटी, डीआरटी, अन्य सभी केंद्रीय कानूनों के तहत आवंटित किया जाए ..."

केस शीर्षक: इम्तियाज अहमद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य

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