Air India Plane Crash | AAIB की शुरुआती रिपोर्ट में फ्यूल कट-ऑफ की जानकारी मांग करने वाली इंजीनियर की PIL खारिज
Shahadat
1 April 2026 8:50 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका खारिज की, जिसमें पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट को "हल्का करने" (Reading Down) की मांग की गई। इस हादसे में 270 लोगों की जान चली गई।
याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट को उस हद तक हल्का करने की मांग की थी, जिस हद तक उसमें घटनाओं का पूरा क्रम और समय-सारिणी (Time Chart) शामिल नहीं था। उन्होंने AAIB की रिपोर्ट में बदलाव की भी मांग की ताकि उसमें फ्लेम-आउट (इंजन का बंद होना) और स्विच के कट-ऑफ से 'रन' (चालू) मोड में जाने की समय-सारिणी शामिल की जा सके—चाहे वह बदलाव यांत्रिक (Mechanical) हो या मैनुअल। हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज की।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
सुनवाई की शुरुआत में ही इससे पहले कि याचिकाकर्ता के वकील कोई ठोस दलील दे पाते, CJI ने याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई।
CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा,
"इस याचिका के पीछे क्या कोई गहरा एजेंडा है? जिन लोगों ने दुर्भाग्यवश अपनी जान गंवाई, उनके परिवार वाले तो सामने नहीं आ रहे हैं। जिनका इस मामले से सीधा कोई लेना-देना है, वे भी किसी मंच के सामने नहीं आ रहे हैं... आपके पास कोई और काम नहीं है तो आप PIL दायर करना शुरू कर देते हैं। जैसे कि हमें समझ ही नहीं आता कि आपका मकसद क्या है।"
वकील ने यह समझाने की कोशिश की कि इसके पीछे कोई निजी मकसद नहीं था, बल्कि याचिकाकर्ता की चिंता सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर थी। हालांकि, पीठ याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत नहीं हुई। सुनवाई समाप्त होने से पहले, वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि वह यह निर्देश दे कि प्रतिवादी (AAIB) याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन (Representation) पर विचार करे, लेकिन CJI ने इस अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।
संक्षेप में कहें तो विचाराधीन रिपोर्ट 'विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो' (AAIB) द्वारा तैयार की गई। 12 जून, 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद लंदन गैटविक जा रही एयर इंडिया की बोइंग 787-8 विमान (फ्लाइट AI171) दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें विमान में सवार सभी 270 लोगों की मौत हो गई।
इस दुर्घटना पर अपनी शुरुआती रिपोर्ट में AAIB ने बताया कि विमान के दोनों इंजनों को होने वाली ईंधन की आपूर्ति, एक-दूसरे से मात्र एक सेकंड के अंतराल पर काट दी गई। इंजीनियर सुरेश चंद श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में कट-ऑफ स्विच के 'रन' से 'कट-ऑफ' स्थिति में जाने के समय और इंजनों के 'फ्लेम आउट' (आग बुझने) के सटीक समय के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई।
उनका मानना था कि इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि इंजनों के फेल होने का कारण 'सर्ज' (अचानक दबाव बढ़ना) था, जिसकी पुष्टि इंजनों के फ्लेम आउट के समय और प्रत्येक फ्लेम स्विच के कट-ऑफ स्थिति में जाने के समय से की जा सकती है।
फरवरी में दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा दायर इसी तरह की एक याचिका खारिज की थी। कोर्ट ने कहा था कि किसी जांच एजेंसी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट की न्यायिक पुनर्विचार नहीं की जा सकती, क्योंकि न्यायपालिका इस क्षेत्र की विशेषज्ञ नहीं है। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
Case Title: SURESH CHAND SHRIVASTVA Versus AIRCRAFT ACCIDENT INVESTIGATION BUREAU (AAIB), SLP(C) No. 11209/2026

