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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की असहमति के बावजूद, अपराध के 21 सालों बाद दिया गया बैंडन बर्नार्ड को मृत्युदंड

LiveLaw News Network
12 Dec 2020 9:20 AM GMT
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की असहमति के बावजूद, अपराध के 21 सालों बाद दिया गया बैंडन बर्नार्ड को मृत्युदंड
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श्रुति रामकृष्णन

संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार ने गुरुवार, 10 दिसंबर, 2020 को 40 वर्षीय ब्रैंडन बर्नार्ड को घातक इंजेक्शन के जर‌िए मृत्‍युदंड दिया, जबकि बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया कैंपेन, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, मशहूर हस्तियों द्वारा मांग की जा रही ‌थी कि ब्रैंडन बर्नार्ड की मौत की सजा माफ की दी जाए।

उल्लेखनीय यह है कि उन नौ जूरी सदस्यों, जिन्होंने वास्तव में बर्नार्ड को दोषी पाया था, में से जीवित बचे पांच सदस्यों ने भी बर्नार्ड के लिए माफी की मांग की थी। यहां तक कि संघीय अभियोजक, जिन्होंने बर्नार्ड के मामले में मुकदमा लड़ा था, उन्होंने भी क्षमादान की अपील की थी।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने, तीन जजों- जस्टिस कागान, जस्टिस सोटोमॉयोर, और जस्टिस ब्रेयर की असहमति के बावजूद, अंतिम मिनट में दायर किए गए मृत्युदंड के स्‍थगन के आवेदन को खारिज कर दिया।

जस्टिस सोटोमॉयोर ने अपने असहमतिपूर्ण फैसले में जोरदार तरीके से कहा, "आज, कोर्ट ने संघीय सरकार को बर्नार्ड को मृत्युदंड देने की अनुमति दे दी, बर्नार्ड के परेशान करने वाले आरोपों के बावजूद, कि सरकार ने दोषमुक्ति संबंधी सबूतों को छुपाकर, और जानबूझकर उनके खिलाफ झूठी गवाही दिलवाकर, उनकी मौत की सजा प्राप्त की है। बर्नार्ड को अदालत में उन दावों की गुणवत्ता को परखने का मौका कभी नहीं दिया गया। अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे।"

ब्रैंडन बर्नार्ड को जून, 1999 में टेक्सास के एक जोड़े के अपहरण, डकैती और उसके बाद हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था, तब उसकी उम्र केवल 18 वर्ष थी। एक संघीय अदालत ने कम उम्र के बावजूद उसे मौत की सजा दी, जब‌कि वह गिरोह में सबसे निचले पायदान पर था, और अपराध में उसकी अग्रणी भूमिका भी नहीं थी।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रोपर बनाम सीमन्स में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों द्वारा किए अपराधों में मृत्युदंड देने को असंवैधान‌िक घोष‌ित कर दिया था, जिसके बाद बर्नार्ड बहुत मुश्किल से ही मृत्युदंड का पात्र था।

बर्नार्ड की सजा के बाद के 20 वर्षों में मस्तिष्क विज्ञान में ‌हुई विशाल प्रगति, जिसने किशोरों के मस्तिष्क की सतत विकसशील प्रकृति; किशोरों पर सहकर्मी समूहों के प्रभाव; और जोखिम और परिणामों का मूल्यांकन करने की उनकी बहुत कम क्षमता, और 25 वर्ष से अधिक उम्र के अपराधियों की तुलना में उनमें सुधार की बढ़ी हुई संभावना, को सामने लाया है, के आलोक में मृत्युदंड विशेष रूप से पीड़ादायी है।

सेंटर फॉर लॉ, ब्रेन और ब‌िहैवियर (मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल, हार्वर्ड लॉ स्कूल, और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से संबद्ध) बताता है कि "किशोर अक्सर जोखिमों को पहचान सकते हैं, लेकिन आवेगपूर्ण व्यवहार के उतार-चढ़ाव से संबंधित मस्तिष्क तंत्र के अधूरे विकास से उन जोखिमों को समझने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।"

बर्नार्ड का मृत्युदंड, जबकि ट्रंप सरकार का कार्यकाल खत्म होने में महीने भर से भी कम समय बचा है, और यह संक्रमण की अवधि है, इसमें दिया गया दुर्लभ मृत्युदंड है। ऐसे संक्रमण काल में, संयुक्त राज्य अमेरिका में पिछले 130 वर्षों में मृत्युदंड नहीं दिया गया है।

30 अमेरिकी राज्यों में मौत की सजा कानूनी है। संघीय मृत्युदंड पर लगाए गए एक अस्थायी अंतराल को ट्रंप सरकार ने तोड़ दिया है, और 17 साल के अंतराल के बाद वर्ष 2020 में नौ संघीय मृत्युदंड दिए गए हैं। ट्रंप के कार्यकाल में कम समय बचे होने के बावजूद सरकार ने निर्धारित पांच मृत्युदंडों को आगे बढ़ाया है, जबकि अमेरिका व्यापक स्तर पर महामारी से जूझ रहा है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, अमेरिका उन 20 देशों में से एक है, जो अभी भी मौत की सजा देता है, जबकि लगभग 142 देशों ने कानून द्वारा मृत्युदंड को समाप्त कर दिया है या व्यवहार में इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है।

(श्रुति रामकृष्णन मानव अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाली एक स्वतंत्र कानूनी सलाहकार हैं।)

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