अमेरिकी कोर्ट ने गौतम अडानी के खिलाफ खारिज किया आपराधिक मामला
Shahadat
11 Aug 2026 11:19 AM IST

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों पर मुकदमा वापस लेने के फैसले के बाद एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज कर दिया है। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने उस तरीके पर चिंता जताई जिससे जस्टिस डिपार्टमेंट ने मामला छोड़ने का फैसला किया।
ब्रुकलिन में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने सोमवार को फेडरल प्रॉसिक्यूटर की आरोप खारिज करने की अपील को मंजूरी दी। यह फैसला तब आया, जब जज ने जस्टिस डिपार्टमेंट से इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे को आगे न बढ़ाने के फैसले के बारे में स्पष्टीकरण मांगा।
जज ने कहा कि उन्हें इस बात पर भरोसा है कि अडानी द्वारा अमेरिका में पहले किए गए 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे ने सरकार के आरोप वापस लेने के फैसले को प्रभावित नहीं किया। साथ ही उन्होंने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, खासकर प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉटटर की भूमिका की आलोचना की।
जज के अनुसार, मैककॉटटर ने मामले की जांच करने वाले प्रॉसिक्यूटर और फेडरल एजेंटों की राय लिए बिना अडानी के बचाव पक्ष के वकीलों के साथ चर्चा के बाद यह फैसला लिया था।
जज गैराफिस ने फैसले से जुड़ी परिस्थितियों को चिंताजनक बताया और कहा कि ऐसा लगता है कि मैककॉटटर ने कई फेडरल ऑफिस के अधिकारियों के प्रोफेशनल आकलन को नजरअंदाज किया और अपनी राय को प्राथमिकता दी।
जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस फैसले का बचाव किया। कोर्ट में पहले दाखिल किए गए दस्तावेजों में मैककॉटटर ने कहा था कि मुकदमा मुख्य रूप से अमेरिका के बाहर के व्यवहार से संबंधित था, इसे साबित करना मुश्किल होता और यह डिपार्टमेंट की मौजूदा प्रवर्तन प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था।
अडानी के खिलाफ आरोप 2024 के एक अभियोग से जुड़े थे, जिसमें उन पर और अन्य लोगों पर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी हासिल करने के मकसद से भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर भुगतान करने की योजना में शामिल होने का आरोप लगाया गया। प्रॉसिक्यूटर ने यह भी आरोप लगाया था कि अमेरिका में निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार-रोधी प्रक्रियाओं के बारे में गुमराह किया गया।
जज ने स्पष्ट किया कि मामला खारिज करने के उनके आदेश को जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मामला खारिज करने का मतलब यह तय करना नहीं है कि अडानी के खिलाफ आरोपों में कोई दम था या नहीं।
इस कार्यवाही ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने के अडानी के पहले के वादे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। अडानी ने कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेज़ों में माना कि उन्होंने 2024 में यह वादा किया। उनके वकीलों ने जस्टिस डिपार्टमेंट को बताया था कि अडानी ग्रुप इस मामले के संभावित समाधान के तौर पर निवेश करने को तैयार है।
हालांकि, जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस बात से इनकार किया कि केस को खारिज करने के उनके फ़ैसले में निवेश के वादे की कोई भूमिका थी।
गाराफिस ने कहा कि वे बचाव पक्ष की ओर से पैसे या अन्य ऑफ़र के ज़रिए मामले को सुलझाने की कोशिशों की उचितता पर कोई राय नहीं दे रहे हैं। उन्होंने जनता पर यह तय करने के लिए छोड़ दिया कि ऐसे ऑफ़र का न्याय के समान प्रशासन और कानून के शासन पर क्या असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन द्वारा लगाए गए सिविल आरोपों को सुलझाने के लिए क्रमशः $6 मिलियन और $12 मिलियन का भुगतान करने पर सहमत हुए हैं। अडानी एंटरप्राइजेज ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोपों को निपटाने के लिए $275 मिलियन का भुगतान करने पर भी सहमत हुई।
हालांकि, गौतम अडानी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला अब खारिज कर दिया गया, लेकिन जज ने संकेत दिया कि व्यापक मामले में अन्य प्रतिवादियों के ख़िलाफ़ आरोपों को खारिज करने का फ़ैसला लेने से पहले उन्हें जस्टिस डिपार्टमेंट से और जानकारी चाहिए।
अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


