ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: वन अधिकार कानून उल्लंघन के आरोपों वाली PIL सुनवाई योग्य, आदिवासी 'बेहद संवेदनशील' समुदाय — कलकत्ता हाईकोर्ट

Praveen Mishra

8 May 2026 8:36 PM IST

  • ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: वन अधिकार कानून उल्लंघन के आरोपों वाली PIL सुनवाई योग्य, आदिवासी बेहद संवेदनशील समुदाय — कलकत्ता हाईकोर्ट

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से जुड़े वन अधिकार कानून के कथित उल्लंघनों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को सुनवाई योग्य माना है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता हैदराबाद की निवासी हैं और उनका अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

    चीफ़ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने कहा कि PIL में लोकस स्टैंडी (locus standi) को लेकर कोई “सख्त नियम” नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि यदि गरीब, असहाय या कमजोर समुदाय अदालत तक नहीं पहुंच सकते, तो कोई भी जागरूक नागरिक उनकी ओर से न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

    मामला रिटायर्ड IAS अधिकारी मीना गुप्ता द्वारा दायर तीन PIL से जुड़ा है, जिनमें ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट, वन अधिकार अधिनियम 2006 के कथित उल्लंघन और राष्ट्रीय उद्यानों के इको-सेंसिटिव बफर जोन कम करने को चुनौती दी गई है।

    केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि यह ₹72,000 करोड़ की राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है, जिसमें बंदरगाह, एयरपोर्ट, पावर स्टेशन और रक्षा सुविधाएं शामिल हैं। सरकार ने यह भी कहा कि जिन जनजातीय समुदायों के हितों की बात की जा रही है, वे खुद अदालत में पक्षकार नहीं हैं।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि परियोजना चाहे कितनी भी बड़ी या महत्वपूर्ण क्यों न हो, वह न्यायिक समीक्षा से परे नहीं हो सकती। अदालत ने यह भी माना कि अंडमान-निकोबार की जनजातियां बेहद संवेदनशील और कमजोर समूह हैं, जो सामान्यतः अदालत तक पहुंचने की स्थिति में नहीं होतीं।

    कोर्ट ने मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 23 जून 2026 को सूचीबद्ध किया है।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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