शादी का वादा शुरुआती बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं कर सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

Praveen Mishra

24 Jun 2026 12:02 PM IST

  • शादी का वादा शुरुआती बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं कर सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखते हुए कहा कि प्रारंभिक जबरन यौन संबंध के बाद किया गया शादी का वादा आरोपी को आपराधिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि बाद में दिए गए झूठे आश्वासनों ने केवल पीड़िता के शोषण को लंबा किया।

    जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि जांच में खामियां होने के बावजूद पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, “केवल त्रुटिपूर्ण जांच के आधार पर बलात्कार जैसे अपराध को अनदेखा करना न्याय का उपहास होगा।”

    अभियोजन के अनुसार आरोपी, पीड़िता के बड़े भाई का मित्र था। उसने 1998 में पीड़िता के साथ जबरन बलात्कार किया और बाद में शादी का वादा कर उससे संबंध बनाए रखे। पीड़िता गर्भवती हुई और एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन आरोपी ने अंततः शादी करने और बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता की कम उम्र और संवेदनशील स्थिति का फायदा उठाया तथा बाद का विवाह का वादा शुरुआती यौन उत्पीड़न की आपराधिक प्रकृति को समाप्त नहीं कर सकता। साथ ही अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत मुआवजा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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