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पुस्तक समीक्षा

राकेश अस्‍थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने खारिज किया

LiveLaw News Network
12 Oct 2021 6:26 AM GMT
राकेश अस्‍थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने खारिज किया
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आईपीएस अधिकारी राकेश अस्‍थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को दिल्‍ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

चीफ ज‌स्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अस्थाना की नियुक्ति के ‌खिलाफ दायर याचिका में एनजीओ 'सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' (सीपीआईएल) ने एडवोकेट प्रशांत भूषण के माध्यम से हस्तक्षेप किया था।

सीपीआईएल ने इससे पहले मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, हालांकि लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था, जहां मौजूदा याचिका पहले से ही लंबित थी। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट से मामले में दो हफ्ते के भीतर फैसला करने का अनुरोध किया था ।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पृष्ठभूमि

दिल्ली पुलिस आयुक्त, राकेश अस्थाना 1984-बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने जुलाई 2021 में दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया था, जिससे उनकी सेवा शुरू में 31.07.2021 को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए बढ़ा दी गई।

अस्थाना की नियुक्ति को कई मामलों में चुनौती दी गई थी, जिनमें यह तथ्य भी शामिल था कि नियुक्ति उनकी सेवानिवृत्ति से केवल चार दिन पहले की गई थी, जो प्रकाश सिंह और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सरासर उल्लंघन था, जहां सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को जहां तक ​​संभव हो ऐसी नियुक्तियों के लिए केवल उन्हीं अधिकारियों पर विचार करना चाहिए, जिनकी दो वर्ष की सेवा शेष है।

मामले में यह भी तर्क दिया गया कि:

-अस्थाना के पास छह महीने का न्यूनतम अवशिष्ट कार्यकाल नहीं था;

-दिल्ली पुलिस आयुक्त की नियुक्ति के लिए यूपीएससी का कोई पैनल नहीं बनाया गया था;

-न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल के मानदंड को नजरअंदाज कर दिया गया था;

-उन्होंने इंटर-कैडर प्रतिनियुक्ति के लिए सुपर-टाइम स्केल को पार कर लिया है।

यह भी तर्क दिया गया था कि एजीएमयूटी संवर्ग से दिल्ली पुलिस आयुक्त की नियुक्ति न करने से उक्त संवर्ग पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि उसमें लगे कर्मचारी अक्षम हैं।

दूसरी ओर, केंद्र ने तर्क दिया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में राकेश अस्थाना की नियुक्ति जनहित में की गई थी क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते दिल्‍ली को कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग के ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है, जिनका राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पार की स्थितियों पर प्रभाव पड़ता है।

इस दलील के जवाब में कि नियुक्ति का एजीएमयूटी कैडर पर मनोबल गिराने वाला प्रभाव पड़ेगा, केंद्र ने कहा था कि अस्थाना को "पूरी तरह से जांच" के बाद दिल्ली पुलिस प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन पर केंद्र ने दावा किया था कि मामले में अंतिम ऑपरेटिव निर्देश राज्य में डीजीपी की नियुक्ति के लिए लागू थे, न कि केंद्र शासित प्रदेशों के लिए।

केस शीर्षक: सद्रे आलम बनाम यूनियन ऑफ इंडिया

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