गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना ही काफी नहीं, आरोपी को नज़दीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना ज़रूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट
Shahadat
30 Sept 2026 9:52 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (29 सितंबर) को कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति को 'सबसे पास वाले' मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।
इसलिए जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले की डिवीज़न बेंच ने कलीम शेख को ज़मानत दी, जिसे सोलापुर ज़िले के बरशी से गिरफ्तार करके मुंबई के पास मीरा रोड लाया गया और वहां पेश किया गया।
पेशे से ड्राइवर शेख पर रेप का केस दर्ज है। उसको 22 अगस्त को सुबह 4:50 बजे सोलापुर के बरशी तालुका में उसके घर से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे मीरा रोड लाया गया, जो लगभग 380 से 400 किलोमीटर दूर है। वहां उसे 22 अगस्त की दोपहर संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, लेकिन मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं थे क्योंकि वे किसी न्यायिक कार्यशाला में शामिल होने गए। इसलिए आरोपी को वापस पुलिस स्टेशन ले जाया गया और फिर शाम 7:45 बजे पेश किया गया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।
मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद बेंच ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाईकोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया और शेख की बात से सहमति जताई कि जांच एजेंसी को उसे सीधे मीरा रोड लाने के बजाय सबसे पास वाले मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना चाहिए था।
बेंच ने स्पष्ट किया,
"...यह स्पष्ट है कि जांच एजेंसी का यह कर्तव्य है कि वह याचिकाकर्ता को बरशी में 'सबसे पास वाले मजिस्ट्रेट' के सामने पेश करे, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। यह तर्क कि उसे 24 घंटे के भीतर पेश किया गया, अपने आप में पर्याप्त नहीं है। गिरफ्तार व्यक्ति को सबसे पास वाले मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए।"
बेंच द्वारा शेख को रिहा करने का विचार व्यक्त करने पर अभियोजन पक्ष ने जजों से उसे फिर से गिरफ्तार करने की अनुमति देने का आग्रह किया। जजों ने मामले के तथ्यों पर विचार किया और शेख को ज़मानत दी तथा 50,000 रुपये की ज़मानत राशि जमा करने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया। बेंच ने अभियोजन पक्ष को शेख को फिर से गिरफ़्तार करने की छूट भी दी, लेकिन यह गिरफ़्तारी कानून के अनुसार होनी चाहिए।
Case Title : Kalim Isaq Shaikh vs State of Maharashtra

