बॉम्बे हाईकोर्ट: कानून के तहत आरक्षण खत्म होने के बाद उसी जमीन को नए डेवलपमेंट प्लान में फिर से आरक्षित नहीं किया जा सकता

Praveen Mishra

25 Aug 2026 4:24 PM IST

  • बॉम्बे हाईकोर्ट: कानून के तहत आरक्षण खत्म होने के बाद उसी जमीन को नए डेवलपमेंट प्लान में फिर से आरक्षित नहीं किया जा सकता

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी जमीन का आरक्षण कानून के संचालन से खत्म (dereserve) हो जाने के बाद उसे बाद के संशोधित डेवलपमेंट प्लान में उद्देश्य में मामूली बदलाव करके दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस रंजीतसिंहा राजा भोंसले और जस्टिस एम.एस. कर्णिक की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 226 और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 (MRTP Act) की धारा 127 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में नासिक महानगरपालिका के स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान में सार्वजनिक सुविधा के लिए किए गए जमीन के आरक्षण को समाप्त घोषित करने और जमीन को विकास के लिए मुक्त करने की मांग की गई थी।

    क्या था मामला?

    विवादित जमीन को 1993 के डेवलपमेंट प्लान में इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन के लिए आरक्षित किया गया था। हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने जमीन का अधिग्रहण करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए।

    इसके बाद जमीन के मालिकों ने 12 दिसंबर 2006 को MRTP Act की धारा 127 के तहत Purchase Notice जारी किया। बाद में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने जमीन की कीमत अधिक होने का हवाला देते हुए अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस ले लिया।

    याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि धारा 127 के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1993 का आरक्षण समाप्त हो गया था। इसलिए उसी जमीन को बाद में नए डेवलपमेंट प्लान में दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    हाईकोर्ट ने Bhavnagar University v. Palitana Sugar Mills और Anil Dattatraya Girme v. State of Maharashtra समेत कई फैसलों का हवाला दिया।

    कोर्ट ने इन फैसलों के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि कानून के संचालन से एक बार डेवलपमेंट प्लान से जमीन का आरक्षण समाप्त हो जाने के बाद, उसी जमीन को संशोधित प्लान में उद्देश्य में कुछ बदलाव करके दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि यह सिद्धांत मौजूदा मामले पर पूरी तरह लागू होता है। 1993 के डेवलपमेंट प्लान में किया गया पहला आरक्षण धारा 127 के तहत समाप्त हो चुका था, लेकिन उसी जमीन को 2017 के डेवलपमेंट प्लान में सार्वजनिक सुविधा के लिए फिर से आरक्षित कर दिया गया।

    हाईकोर्ट ने 1993 का आरक्षण समाप्त होने की बात स्वीकार करते हुए जमीन को आरक्षण से मुक्त करने का आदेश दिया।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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