दहेज की मांग साबित नहीं होने पर पति की 498A IPC के तहत दोषसिद्धि रद्द: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
Praveen Mishra
16 Oct 2026 12:27 PM IST

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पति की दोषसिद्धि और सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब अतिरिक्त दहेज की मांग साबित नहीं हुई, तो मामले के तथ्यों में उससे जुड़ी कथित प्रताड़ना के आरोप को स्वतंत्र रूप से कायम नहीं रखा जा सकता। अदालत ने FIR दर्ज करने में हुई देरी का स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने पर भी ध्यान दिया।
जस्टिस सुभेंदु सामंत ने पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, जुलाई 2002 में शादी के बाद पत्नी ने आरोप लगाया कि पति उससे ₹50,000, सोने के आभूषण और घर के लिए प्लॉट की मांग करते हुए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना करता था। उसने अपनी सास पर भी उत्पीड़न करने और बेटी को जन्म देने पर अपमानित करने का आरोप लगाया।
ट्रायल कोर्ट ने पति और उसकी मां को दोषी ठहराया था। अपीलीय अदालत ने दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत आरोप साबित नहीं होने पर दोनों को बरी कर दिया। सास को IPC की धाराओं 498-A और 506 के आरोपों से भी बरी कर दिया गया, लेकिन पति की धारा 498-A के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी गई।
हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रताड़ना के आरोप अतिरिक्त दहेज की मांग से जुड़े थे। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कथित घटना के 10 दिन से अधिक समय बाद FIR दर्ज की गई और अभियोजन पक्ष देरी का उचित स्पष्टीकरण नहीं दे सका।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने पति की दोषसिद्धि और सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि जमा किया गया जुर्माना कानून के अनुसार वापस किया जाए।

