सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वित्त सचिव को DJB का फंड रिलीज करने का आदेश दिया

Update: 2024-04-06 04:17 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCDT) के वित्त विभाग को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को भुगतान की जाने वाली लंबित राशि का सत्यापन करने और अगली सुनवाई से पहले बकाया राशि का निपटान करने को कहा।

अदालत GNCDT द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उक्त याचिका में आरोप लगाया गया कि उसका अपना वित्त विभाग DJB को देय धनराशि रोक रहा है, जिसे विधायिका द्वारा अनुमोदित किया गया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने प्रधान सचिव (वित्त) की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी को सुझाव दिया कि लंबित धनराशि का विधिवत निपटान किया जा सकता है।

उन्होंने कहा,

"जो भी भुगतान किया जाना है, बुधवार तक सुनिश्चित करें कि आप भुगतान कर दें... उनसे (वित्त विभाग) से इसे सत्यापित करने और भुगतान करने के लिए कहें।"

दिल्ली सरकार के अनुसार, DJB को देय 1927 करोड़ रुपये की अप्रकाशित धनराशि को दिल्ली विधानसभा ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए मंजूरी दे दी।

GNCDT की ओर से उपस्थित शादान फरासत के साथ डॉ. सिंघवी ने कहा कि राज्य मंत्री ने धन के लंबित वितरण के लिए संबंधित अधिकारियों को छह बार लिखा। उन्होंने सुझाव दिया कि अब वित्त वर्ष 2024-25 के बजट से धनराशि आवंटित की जाए।

सीजेआई ने पूछा कि क्या यह संभव है, क्योंकि फंड लैप्स हो चुका होगा। सिंघवी ने न्यायालय को सीजेआई द्वारा दिए गए पहले के आश्वासन की याद दिलाई जब याचिकाकर्ताओं ने तत्काल सुनवाई के लिए पीठ से संपर्क किया था। सिंघवी ने जब 31 मार्च को फंड लैप्स होने का मुद्दा उठाया था तो सीजेआई ने कहा था कि यदि बेंच उनके पक्ष में फैसला सुनाती है तो लैप्स फंड वापस कर दिया जाएगा।

जेठमलानी ने कहा कि प्रक्रियात्मक रूप से केवल डीजेबी ही धन जारी करने की मांग कर सकता है, सरकार नहीं, लेकिन वर्तमान मामले में डीजेबी को एक पक्ष भी नहीं बनाया गया।

उन्होंने आगे कहा,

"बोर्ड यहां पार्टी नहीं है। यह बोर्ड है, जो मांग करता है। हाईकोर्ट में मामला लगभग उन्हीं मुद्दों पर लंबित है, बोर्ड ने हलफनामा दायर किया है .... लोन या सहायता के लिए मांग वित्त विभाग द्वारा उन्नत डीजेबी से आता है, इसमें किसी मंत्री का कोई अधिकार नहीं है, यह मंत्री है, जिसने अपने ही सचिव के खिलाफ मामला दायर किया है।

इसे ध्यान में रखते हुए सीजेआई ने कहा कि पीठ ने डीजेबी को पार्टी के रूप में शामिल किया और लंबित फंड की बारीकियों को समझने के लिए उन्हें नोटिस जारी किया।

ऐसा करते समय न्यायालय ने केंद्रीय अधिकारियों को डीजेबी के लंबित बकाए का भुगतान करने की आवश्यकता पर टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा,

"वित्त विभाग द्वारा कुछ प्रश्न हैं, उन्होंने (याचिकाकर्ता) कहा कि मैंने उन प्रश्नों का उत्तर दे दिया। उसमें निर्देश लें और फिर जो भी देय हो, उसे अपने पिछले वर्ष के फंड से भुगतान करें।"

इस पर सहमति जताते हुए जेठमलानी ने कहा,

"इस याचिका के पीछे एक मकसद है। मैं बस इतना ही कहूंगा।"

पिछली सुनवाई में जीएनसीटीडी ने कहा था कि सचिव सरकार की बात नहीं सुन रहे हैं, क्योंकि संसद ने पिछले साल कानून पारित किया था, जिसमें सिविल सेवकों पर दिल्ली सरकार के नियंत्रण को कम करने और उन्हें एलजी के अधिकार के अधीन बना दिया गया।

उन्होंने पीठ को यह भी बताया कि रिट याचिका दायर होने के बाद वित्त सचिव ने 31 मार्च को 760 करोड़ रुपये जारी किए, जिसका उपयोग उसी दिन लंबित बिलों को निपटाने के लिए किया गया। पीठ ने दिल्ली के वित्त सचिव को भी नोटिस जारी किया।

दिल्ली के उपराज्यपाल ने यह रुख अपनाया कि डीजेबी, जो वैधानिक निकाय है, उसको धन के आवंटन से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

केस टाइटल: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के उपराज्यपाल का कार्यालय डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 000197 - / 2024

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