तेलंगाना में विधायकों के दलबदल मामले पर सुप्रीम कोर्ट की स्पीकर को अंतिम चेतावनी, दो हफ्ते में लंबित याचिकाओं पर फैसला करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 जनवरी) को तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर शेष तीन दलबदल याचिकाओं पर फैसला करें। यह मामला भारत राष्ट्र समिति (BRS) से कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए 10 विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ए.जी. मसीह की खंडपीठ कोर्ट के 31 जुलाई के आदेश के अनुपालन से संबंधित सुनवाई कर रही थी, जिसमें स्पीकर को दलबदल याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
स्पीकर की देरी और अवमानना याचिकाएं
स्पीकर द्वारा समयसीमा के भीतर निर्णय न लेने पर अवमानना याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इसके बाद कोर्ट की कड़ी चेतावनी के पश्चात पिछले दिसंबर में स्पीकर ने 7 याचिकाएं खारिज कर दीं, लेकिन अब भी 3 याचिकाएं लंबित हैं।
आज की सुनवाई
आज सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी (तेलंगाना राज्य की ओर से) ने दो सप्ताह का और समय मांगा।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामोदर शेषाद्रि नायडू ने इसका कड़ा विरोध किया।
नायडू ने कहा कि:
“सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गरिमा बनाए नहीं रखी जा रही है। स्पीकर लगातार बहाने बनाकर निर्णय को टाल रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि एक विधायक खुले तौर पर पार्टी बदल चुका है, चुनाव भी लड़ चुका है, हारने के बावजूद अब भी विधायक बना हुआ है, और यह मामला पूरी तरह स्पष्ट (open and shut) है, फिर भी उस पर आज तक फैसला नहीं हुआ।
राज्य की दलील
सीनियर एडवोकेट सिंघवी ने दलील दी कि:
“पहली सात याचिकाओं का निपटारा हो चुका है। आठवीं पर फैसला सुरक्षित है। शेष तीन पर दो हफ्ते में निर्णय हो जाएगा। इस दौरान स्पीकर की आंख की सर्जरी हुई और विधानसभा सचिव भी बदले गए, जिससे थोड़ा विलंब हुआ।”
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस ए.जी. मसीह ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं किया। पहले भी आपके आश्वासन पर समय दिया गया था। अब यह अंतिम अवसर है। हम चार हफ्ते का समय नहीं देंगे।”
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में बीआरएस के टिकट पर निर्वाचित तीन विधायक—वेंकट राव तेल्लम, कादियम श्रीहरि और दानम नागेंद्र—बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए।
स्पीकर द्वारा तीन महीने से अधिक समय तक अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला न लेने पर:
BRS विधायक कुना पांडु विवेकानंद और पादी कौशिक रेड्डी,
तथा BJP विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी,
ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही
9 सितंबर 2024: हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्पीकर को चार सप्ताह में सुनवाई का कार्यक्रम तय करने का निर्देश दिया।
नवंबर 2024: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह आदेश रद्द करते हुए कहा कि स्पीकर को “उचित समय” में फैसला लेना चाहिए।
इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने खंडपीठ का आदेश रद्द कर स्पीकर को तीन महीने में फैसला करने का निर्देश दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अंतिम अवसर है, और यदि दो सप्ताह में शेष तीन दलबदल याचिकाओं पर निर्णय नहीं हुआ, तो आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।