NOTA के पक्ष में बहुमत साबित होने पर क्या चुनाव रद्द किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ECI से जवाब मांगा

Update: 2024-04-26 07:31 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 अप्रैल) को याचिका पर नोटिस जारी किया। उक्त याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई कि यदि निर्वाचन क्षेत्र से अधिकतम वोट NOTA के लिए डाले जाते हैं तो चुनाव को "अमान्य और शून्य" घोषित किया जाना चाहिए और निर्वाचन क्षेत्र के लिए फिर से चुनाव होना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने यह निर्देश देने की भी मांग की कि जो उम्मीदवार नोटा से हार गए हैं, उन्हें उपचुनाव लड़ने से रोक दिया जाना चाहिए, जो पहला चुनाव रद्द होने के बाद होता है, जहां NOTA को बहुमत वोट मिला था। इसके अलावा, NOTA को "काल्पनिक उम्मीदवार" के रूप में उचित प्रचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में उचित नियम बनाने के लिए भारत के चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ याचिकाकर्ता शिव खेड़ा द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करने के लिए सहमत हुई। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) द्वारा दायर जनहित याचिका में 2013 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में नोटा की शुरुआत की गई थी।

NOTA मतदाता को सभी उम्मीदवारों को असंतोषजनक मानकर अस्वीकार करने का विकल्प देता है। हालांकि, मौजूदा कानून के अनुसार, यदि NOTA को अधिकांश वोट मिलते हैं तो कोई कानूनी परिणाम नहीं होता है। ऐसी स्थिति में अगले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने सूरत निर्वाचन क्षेत्र का हालिया उदाहरण दिया, जहां BJP उम्मीदवार को बिना किसी चुनाव के विजेता घोषित कर दिया गया, क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो गया और अन्य उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। यहां तक कि अगर केवल एक ही उम्मीदवार है तो भी चुनाव होना चाहिए, क्योंकि मतदाता के पास NOTA को वोट देने का विकल्प होना चाहिए।

उन्होंने कहा,

"सूरत में जहां कोई और उम्मीदवार नहीं आया, उन्हें किसी भी उम्मीदवार के साथ जाने के लिए मजबूर किया जाता है।"

यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले से आगे कानून विकसित करने की मांग कर रहा है, सीजेआई चंद्रचूड़ इस मामले पर विचार करने के लिए सहमत हुए।

सीजेआई ने टिप्पणी की,

"आइए देखें कि चुनाव आयोग को क्या कहना है।"

केस टाइटल: शिव खेड़ा बनाम भारत का चुनाव आयोग | डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 252/2024

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