आवारा कुत्तों के मामले में आदेश सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) से स्थानीय संगठनों द्वारा नसबंदी जैसे पशु कल्याण कार्यक्रम चलाने के लिए मान्यता मांगने वाले आवेदनों पर तेज़ी से फैसला लेने को कहा।
कोर्ट ने AWBI से कहा,
"AWBI से बस यही अनुरोध है कि जो भी आवेदन पेंडिंग हैं, आप उन पर तेज़ी से कार्रवाई करें। या तो आप उन्हें एक तय समय के अंदर खारिज कर दें या उन्हें मंज़ूरी दे दें।"
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बता दें, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर एक स्वतः संज्ञान मामला लिया था, जब एक कुत्ते के काटने की घटना के बाद 6 साल की छवि शर्मा की दुखद मौत की खबर आई। इसके बाद कई हस्तक्षेपकर्ता इसमें शामिल हुए और अपनी बात रखी, जिनमें कुत्ते प्रेमी, कुत्तों को खाना खिलाने वाले, पशु कल्याण संगठन, NGO वगैरा के साथ-साथ कुत्ते के काटने के शिकार लोग भी शामिल थे। अलग से याचिकाएं भी दायर की गईं और उन्हें स्वतः संज्ञान मामले के साथ जोड़ दिया गया।
7 नवंबर को कोर्ट ने संस्थागत परिसरों और राजमार्गों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि उन्हें उन जगहों पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया। कई हस्तक्षेपकर्ताओं ने इन निर्देशों में बदलाव के लिए तर्क दिया, जबकि पीड़ितों और अन्य हितधारकों ने इन निर्देशों को गेटेड समुदायों और हाउसिंग सोसाइटियों तक बढ़ाने की प्रार्थना की।
बुधवार को कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल (एमिक्स क्यूरी) और कुछ राज्य के वकीलों को सुना, जिन्होंने एमिक्स की दलीलों का जवाब दिया। सुनवाई के दौरान, इसने कुछ राज्यों के हलफनामों को "अस्पष्ट" बताया और राय दी कि समुद्र तटों पर आवारा कुत्तों के हमले पर्यटन को प्रभावित करते हैं। गुरुवार को बेंच ने बाकी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और AWBI को सुना।
कोर्ट ने NHAI से कहा कि राजमार्गों पर गश्त का काम NHAI को ही करना चाहिए और सुझाव दिया कि वह राजमार्गों पर जानवरों को देखे जाने की रिपोर्ट करने के लिए एक ऐप बनाए। दूसरी ओर, NHAI ने कोर्ट को बताया कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अधिसूचित कर दिए गए और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निर्देश जारी किए गए। हालांकि, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब सहित कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने NHAI के काफी प्रयासों के बावजूद बैठकों के लिए आगे नहीं आए। AWBI के वकील ने कोर्ट को बताया कि उपलब्ध डेटा के अनुसार, देश भर में 883 सेंटर (नसबंदी के लिए) हैं, जिनमें से 76 को AWBI ने मान्यता दी। लगभग 250 सेंटरों के आवेदन अभी पेंडिंग हैं।
जस्टिस नाथ ने पूछा,
"ये कब से पेंडिंग हैं?"
इस पर वकील ने कहा कि 7 नवंबर को कोर्ट के आदेश के बाद कई आवेदन मिले थे।
इसके बाद कोर्ट ने AWBI के वकील से पूछा कि जिन सेंटरों को मान्यता नहीं मिली है, वहां क्या हो रहा है। जवाब में उन्होंने डेटा में एक गड़बड़ी बताई, जिसमें कहा गया कि कुछ मामलों में (जैसे उत्तराखंड) नसबंदी की संख्या उस इलाके में कुत्तों की कुल आबादी से ज़्यादा है।
जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की,
"कारण साफ हैं, सभी को पता है। कितनी ग्रांट दी जाती है?"
Case Title: In Re : 'City Hounded By Strays, Kids Pay Price', SMW(C) No. 5/2025 (and connected cases)