राशन से वंचित करने के खिलाफ याचिका वापस, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को राशन लाभ नहीं देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की अनुमति दी।
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रसन्ना एस की मौखिक प्रार्थना पर याचिका वापस लेने की अनुमति दी और उचित राहत के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता प्रदान की।
यह याचिका पश्चिम बंगाल के खेतिहर मजदूर संगठन 'पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति' ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है।
मामले का उल्लेख एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए किया गया। उस दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटा सकता।
इस पर वकील प्रसन्ना एस ने दलील दी थी कि यह केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित मुद्दा नहीं है, क्योंकि अन्य राज्यों में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पहले ही वैध ठहरा चुका है, इसलिए इस विवाद पर विचार करने के लिए वही उपयुक्त मंच है।
हालांकि, पीठ ने माना कि यह मामला एक अलग कारण-ए-कार्यवाही से जुड़ा है और इसके लिए संबंधित हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है।
जस्टिस नागरत्ना ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।
इसी पृष्ठभूमि में गुरुवार को मामले का फिर उल्लेख किया गया, जिसके बाद याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई और याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट में उचित राहत मांगने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी गई।