EVM वोटों की गिनती में Totalizer सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने EVM से डाले गए वोटों की booth-wise गिनती के बजाय कई EVM के वोटों को एक साथ जोड़कर गिनने वाले “Totalizer” सिस्टम को लागू करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में मांग की गई है कि चुनाव परिणाम पूरे निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर घोषित किए जाएं, ताकि किसी खास बूथ का मतदान पैटर्न सामने न आए।
क्या है Totalizer सिस्टम?
Totalizer एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कई EVM के वोटों को एक साथ क्लब करके गिना जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को किसी खास polling booth पर मिले वोटों की सटीक संख्या का पता न चले।
याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दलील दी कि इससे मतदाताओं की गोपनीयता सुरक्षित होगी और चुनाव के बाद बूथ के मतदान पैटर्न के आधार पर डराने-धमकाने या हिंसा की आशंका कम होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?
CJI ने सवाल किया कि मौजूदा booth-wise counting व्यवस्था में पारदर्शिता है, तो Totalizer से लोकतंत्र को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सिद्धांत रूप में Totalizer voter choice को anonymise करने का अच्छा माध्यम है, लेकिन इसे लागू करने के लिए वैधानिक आधार जरूरी होगा।
कोर्ट ने केंद्र से यह बताने को कहा है कि Totalizer लागू करने में क्या कानूनी या व्यावहारिक बाधाएं हैं और इसके लागू होने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा या नहीं। ECI को भी केंद्र के समक्ष अपना प्रस्ताव रखने को कहा गया है।
ECI ने क्यों जताई आपत्ति?
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में फिलहाल Totalizer लागू करने का विरोध किया है। ECI के अनुसार, मौजूदा कानून में EVM वोटों की Totalizer के जरिए गिनती के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
आयोग ने Form 17C की booth-wise व्यवस्था का भी हवाला दिया है। उसके अनुसार, मतदान के समय दर्ज वोटों और counting के दौरान दर्ज वोटों के बीच booth-wise और EVM-wise मिलान मौजूदा counting system की पारदर्शिता और self-verification का आधार है।
ECI का कहना है कि कई EVM के वोटों को एक साथ जोड़ने से किसी एक मशीन में हुई संभावित गड़बड़ी अलग से सामने नहीं आ पाएगी और aggregate figure में छिप सकती है।
आयोग ने यह भी कहा कि Totalizer लागू होने से सुप्रीम कोर्ट द्वारा VVPAT verification और EVM memory/microcontroller verification से संबंधित मौजूदा निर्देशों के पालन में भी व्यावहारिक कठिनाई आ सकती है।
Totalizer का प्रस्ताव नया नहीं
Totalizer का प्रस्ताव पहले भी सामने आ चुका है। Law Commission की 255वीं रिपोर्ट ने भी कुछ परिस्थितियों में इसे लागू करने की सिफारिश की थी। हालांकि, ECI के अनुसार, 2016 में अधिकांश राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था और उस समय गठित Group of Ministers ने भी इसे समर्थन नहीं दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के सवाल के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के रुख पर अगली सुनवाई में विशेष नजर रहेगी।