सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन को लेकर बार-बार याचिका दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- “आप इस सम्मान के योग्य नहीं”

Update: 2026-05-15 08:22 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) पदनाम को लेकर बार-बार याचिकाएं दाखिल करने वाले एक वकील को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने वकील के पेशेवर आचरण पर गंभीर टिप्पणी की।

वकील ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कहा कि यह तीसरी बार है जब उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ पदनाम से संबंधित उनकी याचिका पर समयबद्ध तरीके से विचार नहीं किया। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने बताया कि वरिष्ठ पदनाम की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इंटरव्यू हो रहे हैं।

इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा, “दुनिया में हर कोई सीनियर डिज़िग्नेशन के योग्य हो सकता है, लेकिन कम से कम आप नहीं हैं। अगर हाईकोर्ट आपको सीनियर बना भी देता है तो हम आपके पेशेवर आचरण को देखते हुए उसे रद्द कर देंगे।”

जस्टिस बागची ने भी वकील से पूछा, “क्या आपके पास कोई और मुकदमा नहीं है, सिवाय अपने सीनियर डिज़िग्नेशन के पीछे पड़े रहने के? क्या यही उस व्यक्ति का आचरण है जो सीनियर एडवोकेट बनने की उम्मीद करता है?”

सुनवाई के दौरान CJI ने यह भी कहा कि वे जल्द ही कई वकीलों की एलएलबी डिग्रियों की CBI जांच कराने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ वकीलों की गतिविधियां देखकर उनकी डिग्रियों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह होता है। CJI ने टिप्पणी की, “क्या उन्हें लगता है कि हम फेसबुक और यूट्यूब पर उनकी पोस्ट नहीं देख रहे?”

हालांकि बाद में वकील ने अदालत से माफी मांग ली, जिसके बाद कोर्ट ने अपने कठोर आदेश को वापस ले लिया। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।

Tags:    

Similar News