S. 62 IBC | अपील दायर करने की समय-सीमा NCLAT के आदेश सुनाए जाने की तारीख से शुरू होती है, न कि सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को कहा कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 62 के तहत अपील दायर करने की समय-सीमा उस तारीख से शुरू होती है, जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) अपना आदेश सुनाता है, न कि उस तारीख से जब अपील करने वाले को सर्टिफाइड कॉपी मिलती है।
जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने और उसे प्राप्त करने में वादी द्वारा बिताए गए समय को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 12(2) के तहत हटाया जा सकता है, लेकिन कॉपी के लिए आवेदन करने से पहले कुछ न करने की अवधि को नहीं हटाया जा सकता।
कोर्ट ने दोहराया कि IBC की धारा 62 सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील दायर करने के लिए 45 दिनों की समय-सीमा तय करती है, और देरी को माफ़ करने के लिए अतिरिक्त 15 दिन मिलते हैं। 60 दिनों की अधिकतम सीमा को बढ़ाया नहीं जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"धारा 62(1) में 'आदेश प्राप्त होने की तारीख' वाक्यांश का अर्थ वह तारीख नहीं माना जा सकता, जब कोई पक्ष सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने और उसे लेने का फैसला करता है। अगर वादी की सुविधा के अनुसार कॉपी लेने तक समय-सीमा की गिनती रुकी रहती, तो समय-सीमा बदलती रहती और अनिश्चित हो जाती।"
रेवेन्यू विभाग ने NCLAT के आदेश के खिलाफ 21 नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। उसने 6 सितंबर, 2023 को NCLAT के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन किया था और 11 अक्टूबर, 2023 को उसे कॉपी मिली थी।
रेवेन्यू विभाग की इस दलील को खारिज करते हुए कि समय-सीमा की गिनती सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से होनी चाहिए, जस्टिस भट्टी द्वारा लिखे गए फैसले में बताया गया कि ऐसी व्याख्या से समय-सीमा अनिश्चित हो जाएगी और IBC के तहत अपील से जुड़ी कानूनी व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।
कोर्ट ने कहा,
"अगर अपील करने वाले की यह दलील मान ली जाए कि समय-सीमा (लिमिटेशन पीरियड) उस दिन से शुरू होती है, जिस दिन ऑर्डर की कॉपी मिलती है, तो इससे समय-सीमा और छूट मिल सकने वाली अवधि (कंडोनेबल पीरियड) दोनों ही बेकार हो जाएंगे, और अपील का अधिकार एक ऐसी समय-सीमा के अधीन हो जाएगा जो अनिश्चित और बदलती रहती है।"
कोर्ट ने *V. Nagarajan v. SKS Ispat and Power Limited* और *CA Ramchandra Dallaram Choudhary v. Adani Infrastructure and Developers Private Limited, 2026 LiveLaw (SC) 611* में दिए गए अपने फैसलों का सहारा लिया।
इन सिद्धांतों को लागू करते हुए कोर्ट ने हिसाब लगाया कि सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने से पहले रेवेन्यू विभाग ने 35 दिन बीतने दिए। हालांकि कॉपी देने में रजिस्ट्री द्वारा लिए गए 35 दिनों को हटा दिया गया, फिर भी कॉपी मिलने पर रेवेन्यू विभाग के पास मूल 45 दिनों की समय-सीमा में केवल 10 दिन बचे थे, जिसके बाद अधिकतम 15 दिनों की छूट मिल सकने वाली अवधि (कुल 25 दिन) थी।
इसलिए सर्टिफाइड कॉपी मिलने के 41 दिन बाद दायर की गई अपील अधिकतम स्वीकार्य अवधि से बाहर थी।
कोर्ट ने कहा,
"कार्रवाई योग्य अवधियों को जोड़ने पर, यानी सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने से पहले के 35 दिन और उसे प्राप्त करने के बाद के 41 दिन, कुल 76 दिन होते हैं। IBC की धारा 62 के तहत कानूनी तौर पर अधिकतम सीमा 60 दिन है, यानी 45 दिन और 15 दिन की छूट मिल सकने वाली अवधि। सर्टिफाइड कॉपी तैयार करने में लगे समय को हटाने के बाद भी अपील देरी को माफ करने के लिए इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र की अधिकतम सीमा से 16 दिन बाद दायर की गई। मौजूदा मामले में ऊपर बताई गई बातों को लागू करने पर अपील समय-सीमा से बाहर है।"
नतीजतन, समय-सीमा से बाहर होने के कारण अपील खारिज कर दी गई।
Case Title : THE ASSISTANT COMMISSIONER OF CENTRAL TAX, CGST DIVISION VERSUS SREENIVASA RAO RAVINUTHALA AND ANOTHER