पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।
लेवल 8 पर ₹4,800 के ग्रेड पे के साथ 4 साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद वे सातवें सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों के अनुसार, लेवल 9 (ग्रेड पे ₹5,400) में 'नॉन-फ़ंक्शनल अपग्रेडेशन' (NFU) के लिए पात्र हो गए।
हालांकि, सरकार ने यह कहते हुए उन्हें इस फ़ायदे से वंचित कर दिया कि NFU का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी सीधी भर्ती (Direct Recruitment) लेवल 8 पर हुई थी, जबकि पे कमीशन ने न तो ऐसी कोई पाबंदी लगाई थी और न ही यह अनिवार्य किया था कि यह लाभ केवल सीधी भर्ती वालों तक ही सीमित रहेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलील स्वीकार करते हुए उन्हें लेवल 9 के लाभ देने का निर्देश दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
केंद्र सरकार की अपील ख़ारिज करते हुए जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी द्वारा लिखे गए फ़ैसले में यह टिप्पणी की गई कि सरकार ने एक अतिरिक्त शर्त—कि केवल लेवल 8 पर सीधी भर्ती वाले ही पात्र होंगे—लगाकर याचिकाकर्ताओं को NFU के लाभ से अनुचित रूप से वंचित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सातवें पे कमीशन की सिफ़ारिशों में ऐसी किसी शर्त का कोई ज़िक्र नहीं है। इस तरह की शर्त लगाकर किसी को भी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"NFU का लाभ इस आधार पर रोकना कि याचिकाकर्ताओं ने ₹4,800 के ग्रेड पे के साथ सेवा शुरू नहीं की थी—और इस तरह सातवें पे कमीशन की सिफ़ारिशों के संबंधित पैराग्राफ़ में 'एंट्री-लेवल' (शुरुआती स्तर) की शर्त जोड़ना—NFU का लाभ देने के लिए अतिरिक्त शर्तें लगाने जैसा ही है।"
कोर्ट ने आगे कहा,
“सीधी-सादी रीडिंग से यह लगता है कि लेवल 8 में चार साल की सर्विस पूरी होने पर और सीनियरिटी-कम-उपयुक्तता के आधार पर एक जूनियर इंजीनियर NFU का हकदार है। 4,800/- रुपये के एंट्री-लेवल जूनियर ग्रेड के साथ ऑप्शन पर ज़ोर देने से रिट याचिकाकर्ताओं को सातवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सुझाया गया फ़ायदा नहीं मिल पाएगा।”
कोर्ट ने आदेश दिया,
“यह मनाही सही वजहों से नहीं है। इसलिए हमें अपील के तहत दिए गए आदेश में दखल देने का कोई कारण नज़र नहीं आता। सिविल अपील खारिज की जाती है।”
तदनुसार, अपील खारिज कर दी गई।
Cause Title: UNION OF INDIA & OTHERS VERSUS SUNIL KUMAR RAI & OTHERS