Indian Succession Act | पत्नी की मौत के बाद उसकी संपत्ति का मालिकाना हक किसे मिलता है? सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई उत्तराधिकार कानून समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को साफ़ किया कि ईसाई उत्तराधिकार कानून के तहत पति द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी गई संपत्ति पत्नी की ही संपत्ति मानी जाती है। इसलिए उसकी मौत के बाद ऐसी संपत्ति का उत्तराधिकार उसकी अपनी मिल्कियत के आधार पर तय किया जाना चाहिए। इसे इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 33 लागू करने के मकसद से पति की संपत्ति नहीं माना जा सकता।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की। उस फैसले में मृतक पत्नी के नाम पर मौजूद संपत्ति को उसके पति की संपत्ति का हिस्सा माना गया और इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 33 लागू की गई।
ISA की धारा 33 में प्रावधान है कि जब कोई पुरुष बिना वसीयत किए मर जाता है और उसकी विधवा और सीधी वंशज (बच्चे-पोते आदि) जीवित हों तो उसकी संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा विधवा को और दो-तिहाई हिस्सा सीधी वंशजों को मिलता है।
कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस प्रावधान को गलत तरीके से लागू किया, क्योंकि धारा 33 बिना वसीयत मरे पुरुष की संपत्ति के उत्तराधिकार पर लागू होती है और इसे पत्नी की मिल्कियत वाली संपत्ति के उत्तराधिकार को तय करने के लिए लागू नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"...धारा 33 को लागू करना गलत लगता है, क्योंकि इसे लागू करने से हाईकोर्ट का मतलब यह निकलता है कि एमए की 2 पत्नियों के नाम पर कानूनी रूप से खरीदी गई संपत्ति असल में कानून की नज़र में उसकी (पति की) संपत्ति है, जबकि ऐसा नहीं है। चूंकि संपत्ति एमए की 2 पत्नियों के नाम पर है, इसलिए यह उनकी संपत्ति है।"
संक्षेप में मामला
पति मैट्टस एंथनी (एमए) ने 1959 में 300 रुपये में अपनी दोनों पत्नियों - फिलोमिना (पहली पत्नी) और श्याम बाई (दूसरी पत्नी) - के नाम पर ज़मीन खरीदी थी। फिलोमिना के तीन बच्चे (वादी) थे, जबकि श्याम बाई का एक बेटा, जॉन एंथनी था। फिलोमिना की मौत 1985 में एमए की मौत 1991 में और श्याम बाई की मौत 2000 में हुई। जॉन एंथनी की मौत अपनी माँ श्याम बाई से पहले, 1985 में ही हो गई।
2002 में प्रतिवादियों (जॉन एंथनी के बच्चे) ने प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा प्रतिवादी नंबर 6 को बेच दिया, जिसके बाद वादियों ने मुकदमा दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने फैसला वादियों के पक्ष में सुनाया, फर्स्ट अपीलेट कोर्ट ने इसे पलट दिया, और हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों विधवाओं को संयुक्त रूप से 1/3 हिस्सा मिलेगा, जबकि वादियों को "सीधे वंशज" (lineal descendants) के तौर पर 2/3 हिस्सा मिलेगा।
जस्टिस करोल के फैसले में कहा गया कि निचली अदालतों ने उत्तराधिकार कानून लागू करने में गलती की है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि प्रॉपर्टी पत्नियों की थी, इसलिए उत्तराधिकार का फैसला ISA की धारा 35 के तहत होगा। इस धारा के अनुसार, जब कोई पत्नी बिना वसीयत (Intestate) के मरती है, तो उसके पति (एमए) को वही हिस्सा मिलता है जो पत्नी को तब मिलता जब उसका पति धारा 33 के तहत बिना वसीयत के मरता।
कोर्ट ने कहा,
"...चूंकि फिलोमिना की मौत एमए से पहले हो गई थी, इसलिए ISA की धारा 35 लागू होने पर एमए का फिलोमिना की प्रॉपर्टी पर वही अधिकार होगा जो फिलोमिना का तब होता अगर एमए की मौत उससे पहले हुई होती।"
ISA की धारा 33(a) के अनुसार, अगर कोई पुरुष बिना वसीयत के मरता है और अपनी विधवा को पीछे छोड़ जाता है, और अगर उसके सीधे वंशज/बच्चे भी हैं तो उसकी प्रॉपर्टी का एक-तिहाई हिस्सा उसकी विधवा को मिलेगा और बाकी दो-तिहाई हिस्सा उसके सीधे वंशजों/बच्चों को मिलेगा।
कानून को लागू करते हुए कोर्ट ने कहा कि चूंकि पहली पत्नी फिलोमिना की मौत बिना वसीयत के हुई, इसलिए प्रॉपर्टी में उसके हिस्से का एक-तिहाई हिस्सा उसके पति (एमए) को मिलेगा और बाकी दो-तिहाई हिस्सा उसके बच्चों को मिलेगा।
कोर्ट ने कहा,
"इसका असर यह होगा कि फिलोमिना के नाम वाली प्रॉपर्टी के हिस्से में से एक-तिहाई हिस्सा एमए के पास रहेगा और बाकी दो-तिहाई हिस्सा उसके उत्तराधिकारियों, यानी वादियों को मिलेगा। पूरी प्रॉपर्टी पर धारा 33 लागू नहीं होगी क्योंकि पूरी प्रॉपर्टी कभी भी एमए के नाम पर नहीं थी।"
पति को मिली पहली पत्नी की एक-तिहाई हिस्सेदारी का बंटवारा कैसे होगा?
इसके बाद सवाल यह उठा कि एमए को अपनी पहली पत्नी फिलोमिना की मौत के बाद विरासत में मिले एक-तिहाई हिस्से का बंटवारा कैसे होगा। खास तौर पर, मुद्दा यह था कि क्या इंडियन सक्सेशन एक्ट (ISA) की धारा 33 लागू होगी, जिससे दूसरी पत्नी श्याम बाई को फिलोमिना से एमए को मिले हिस्से में से कुछ हिस्सा मिल सके, या फिर एमए की मौत के बाद वह हिस्सा सिर्फ़ उनके बच्चों को मिलेगा, जिनमें दूसरी पत्नी श्याम बाई से हुए बच्चे भी शामिल हैं।
कोर्ट ने साफ़ किया कि एमए को विरासत में मिला पहली पत्नी का एक-तिहाई हिस्सा एमए के चार बच्चों में बांटा जाएगा, यानी तीन पहली पत्नी से और एक दूसरी पत्नी से। दूसरी पत्नी का पहली पत्नी की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा, और न ही वह ISA की धारा 33 का हवाला देकर हिस्सा मांग सकती है, क्योंकि वह संपत्ति एमए की अपनी नहीं थी।
कोर्ट ने कहा,
"फिलोमिना की मौत के बाद एमए को मिली उसकी संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा फिलोमिना और श्याम बाई से हुए एमए के बच्चों, यानी वादी (Plaintiffs) और जॉन एंथनी को मिलेगा। दूसरे शब्दों में, एक-तिहाई हिस्सा एमए और श्याम बाई के चार बच्चों में बांटा जाएगा।"
दूसरी पत्नी की मौत के बाद उसकी संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा?
साथ ही, यह सवाल भी उठा कि बिना वसीयत (Intestate) मरे व्यक्ति, यानी दूसरी पत्नी की संपत्ति का बंटवारा कैसे होगा। कोर्ट ने माना कि उसकी संपत्ति का बंटवारा ISA की धारा 38 के तहत होगा। यह धारा तब संपत्ति के बंटवारे के नियम तय करती है, जब कोई व्यक्ति बिना वसीयत के मरता है और उसका कोई बच्चा जीवित नहीं होता, लेकिन पोते-पोतियां जीवित होते हैं।
चूंकि उसका बेटा 1985 में उससे पहले ही मर चुका था, इसलिए उसकी संपत्ति उसके चार पोते-पोतियों में बराबर-बराबर बांटी जाएगी।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने ईसाई उत्तराधिकार कानून के तहत उत्तराधिकार तय करने में निचली अदालतों से हुई गलती को सुधारा।
Cause Title: SHAKUNTALA & ORS. VERSUS ROBERT ANTHONY & ORS.