सरकारी अनुदान वाली संपत्तियों पर किराया कानून लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ बेदखली आदेश रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि Government Grants Act, 1895 के तहत दी गई संपत्तियों पर किराया नियंत्रण कानून लागू नहीं होते और ऐसे मामलों में पक्षकारों के अधिकार केवल लीज (अनुदान) की शर्तों से तय होंगे। इसी आधार पर अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भारत सरकार को किराया न चुकाने के कारण बेदखल करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि लीज डीड में किराया न देने पर बेदखली का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो केवल उस आधार पर कब्जा खाली नहीं कराया जा सकता।
मामले का विवरण
मामला नई दिल्ली के सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसरों से जुड़ा है, जहां भारत सरकार लीज व्यवस्था के तहत कई फ्लैट, सर्वेंट क्वार्टर और गैरेज का उपयोग कर रही थी। संपत्ति के मालिक Sir Sobha Singh & Sons Pvt Ltd ने आरोप लगाया कि 1989 से 1991 के बीच किराया नहीं दिया गया और इसके आधार पर दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि—
यह मामला सामान्य मकान मालिक-किरायेदार संबंध का नहीं, बल्कि सरकारी अनुदान का है
Government Grants Act की धारा 3 के तहत अनुदान की शर्तें अन्य सभी कानूनों पर प्रभावी होती हैं
किराया कानून जैसे Delhi Rent Control Act यहां लागू नहीं होंगे
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मकान मालिक का अधिकार केवल बकाया किराया वसूलने तक सीमित है, जब तक कि लीज में बेदखली का स्पष्ट प्रावधान न हो।
हाईकोर्ट के आदेश पर टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों और दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को सामान्य किरायेदारी विवाद मानकर गलती की और Government Grants Act के प्रभाव को नजरअंदाज किया।
फैसला
अदालत ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए बेदखली की कार्यवाही को निरस्त कर दिया और कहा कि किराया वसूली के लिए अलग कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन बेदखली नहीं।