कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज मोटर इंश्योरेंस में गाड़ी में बैठे लोग भी कवर होते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग तरह की पॉलिसी के बारे में बताया

Update: 2026-08-05 15:55 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में गाड़ी के मालिक और उसमें बैठे लोग कवर होते हैं और इसे बेसिक थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी के बराबर नहीं माना जा सकता। साथ ही कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनियों को एक स्टैंडर्ड "ऑप्ट-इन" सिस्टम अपनाने की सलाह दी है, जिससे ग्राहक इंश्योरेंस खरीदते समय अतिरिक्त कवर चुन सकें।

यह फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की उस अपील पर आया, जो तेलंगाना हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई। हाईकोर्ट ने टी. रामू के परिवार को मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिनकी मौत अपनी ही मारुति 800 कार के सड़क हादसे में हो गई।

रामू 13 जुलाई, 1996 को तिरुपति से अपने गाँव लौट रहे थे, तभी सिंगरायकोंडा के पास एक अज्ञात लॉरी ने पीछे से उनकी कार को टक्कर मार दी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। चूंकि टक्कर मारने वाली लॉरी का पता नहीं चल सका, इसलिए उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने उनकी अपनी गाड़ी की कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मुआवज़े की मांग की।

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए दावा खारिज किया था कि मालिक के पर्सनल रिस्क को कवर करने के लिए कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं दिया गया। हालांकि, तेलंगाना हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और परिवार को 7.5% सालाना ब्याज के साथ ₹10,00,500 देने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में गाड़ी में बैठे मालिक को भी कवर किया जाता है।

इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने हाईकोर्ट के नज़रिए को सही ठहराया। 16 नवंबर, 2009 के IRDA सर्कुलर का ज़िक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि कॉम्प्रिहेंसिव या पैकेज पॉलिसी के तहत, इंश्योरेंस कंपनियाँ गाड़ी में बैठे लोगों को मुआवज़ा देने के लिए ज़िम्मेदार हैं। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम में अदालतों को बहुत ज़्यादा तकनीकी नज़रिया नहीं अपनाना चाहिए, बेंच को हाईकोर्ट के तर्क में दखल देने का कोई कारण नहीं मिला।

बेंच ने कहा,

"यह बात अच्छी तरह से तय है कि मोटर दुर्घटना के दावों से जुड़े मामलों में अदालतों को बहुत ज़्यादा तकनीकी नज़रिया नहीं अपनाना चाहिए। जैसा कि दावा करने वाले प्रतिवादियों ने सही कहा, IRDA के 16.11.2009 के सर्कुलर के अनुसार, बीमा कंपनियाँ कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज पॉलिसी के तहत गाड़ी में सवार किसी भी व्यक्ति के लिए मुआवज़ा देने की ज़िम्मेदार हैं। इसलिए हमेंहाई कोर्ट के तर्क से असहमत होने का कोई कारण नहीं दिखता। इस हद तक मौजूदा सिविल अपील खारिज की जाती है।"

अपील पर फ़ैसला करते समय कोर्ट ने मौजूदा मोटर बीमा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा भी की और उपलब्ध बीमा पॉलिसियों की विभिन्न श्रेणियों के बारे में बताया।

बीमा के प्रकार

1. थर्ड-पार्टी बीमा: बेंच ने बताया कि MVA एक्ट के तहत यह पॉलिसी अनिवार्य है। इसे आमतौर पर 'एक्ट ओनली पॉलिसी' कहा जाता है। इसमें तीसरे पक्ष (थर्ड-पार्टी) को चोट लगने, मौत होने या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुँचने की स्थिति में दायित्व (liability) कवर किया जाता है। हालाँकि, इसमें बीमित गाड़ी को हुए नुकसान को कवर नहीं किया जाता है।

बेंच ने बताया कि MVA की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी जोखिमों को कवर करने वाला बीमा (जिसे थर्ड-पार्टी बीमा भी कहा जाता है) अनिवार्य है। कानूनी प्रावधान के अनुसार, थर्ड-पार्टी बीमा के बिना किसी भी व्यक्ति को गाड़ी का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।

2. कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी: इसमें गाड़ी में बैठे लोगों को चोट लगने, मौत होने या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर होने वाली देनदारी (liability) शामिल होती है। उदाहरण के लिए, इसमें ड्राइवर के साथ-साथ गाड़ी की पैसेंजर सीट पर बैठे व्यक्ति का बीमा भी शामिल होगा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी को अपनी वेबसाइट पर कॉम्प्रिहेंसिव मोटर-व्हीकल इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के फायदों को आसानी से पढ़े जा सकने वाले फॉर्मेट में दिखाना चाहिए।

3. ओन-डैमेज कवर: यह एक ऑप्शनल स्टैंडअलोन पॉलिसी है, जो पॉलिसी की शर्तों के आधार पर दुर्घटना, आग, चोरी आदि के कारण बीमित गाड़ी को हुए नुकसान को कवर करती है।

4. कमर्शियल व्हीकल इंश्योरेंस पॉलिसी: इसमें कमर्शियल/बिज़नेस के मकसद से इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां, जैसे ट्रक आदि शामिल हैं। इसमें थर्ड-पार्टी लायबिलिटी के साथ-साथ ले जाए जा रहे सामान, गाड़ी में बैठे लोगों और खुद गाड़ी को हुए नुकसान को भी कवर किया जाता है।

कोर्ट ने IRDAI की बात को नोट किया कि प्राइवेट गाड़ियों के लिए चार-लेयर वाला एक व्यापक बीमा स्ट्रक्चर शुरू किया जाएगा, ताकि गाड़ी मालिकों को उपलब्ध अलग-अलग पॉलिसी विकल्पों के बारे में ज़्यादा स्पष्टता मिल सके और वे सही जानकारी के साथ चुनाव कर सकें।

IRDAI के अनुसार, पहली लेयर में अनिवार्य 'थर्ड-पार्टी ओनली पॉलिसी' होगी, जो बेस पॉलिसी और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत ज़रूरी न्यूनतम बीमा कवर के तौर पर काम करेगी। इस पॉलिसी का प्रीमियम IRDAI और केंद्र सरकार के बीच बातचीत की प्रक्रिया के ज़रिए तय किया जाता रहेगा।

दूसरी लेयर में गाड़ी में बैठे लोगों या पीछे बैठने वालों (Pillion Riders) के लिए एक ऑप्शनल 'लीगल लायबिलिटी कवर' शामिल होगा, जिसमें मालिक, ड्राइवर और बीमित व्यक्ति के परिवार के सदस्य शामिल नहीं होंगे। IRDAI ने बताया कि यह कवर अतिरिक्त प्रीमियम के भुगतान पर उपलब्ध होगा और इसकी कीमत संबंधित बीमा कंपनियां तय करेंगी।

तीसरी लेयर मालिक, ड्राइवर और गाड़ी में बैठे सभी लोगों या पीछे बैठने वालों (बीमित व्यक्ति के परिवार के सदस्यों सहित) के लिए एक ऑप्शनल 'पर्सनल एक्सीडेंट कवर' होगी। यह कवर मौत या स्थायी विकलांगता के मामलों में मुआवज़ा देगा और इसका प्रीमियम बीमा कंपनियां तय करेंगी।

चौथी लेयर एक ऑप्शनल 'ओन डैमेज कवर' होगी, जो गाड़ी को नुकसान या क्षति से बचाने के लिए बीमा करेगी। इसका प्रीमियम भी संबंधित बीमा कंपनियां ही तय करेंगी। कोर्ट ने सुझाव दिया कि मोटर इंश्योरेंस खरीदने वाले हर ग्राहक को—चाहे वे ऑनलाइन खरीदें या ऑफलाइन—एक "कस्टमर ऑप्शन फ़ॉर्म" दिया जाए। इस फ़ॉर्म में ज़रूरी थर्ड-पार्टी पॉलिसी और सभी ऑप्शनल कवर की जानकारी हो, साथ ही उनके कवरेज की डीटेल्स और लागू होने वाले प्रीमियम भी बताए गए हों। ग्राहक चेक बॉक्स चुनकर अपनी पसंद के ऑप्शनल कवर चुन सकेंगे।

कोर्ट ने इस तरह का एक टेम्प्लेट सुझाया:

कोर्ट ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो IRDA कस्टमर ऑप्शन फ़ॉर्म के फ़ॉर्मैट में बदलाव कर सकता है।

Case Details: National Insurance Co Ltd v Smt Thungala Dhana Laxmi

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