राज्य PSCs द्वारा की जाने वाली इंजीनियरिंग प्रोफेसरों की सीधी भर्ती पर AICTE नियम लागू नहीं होते: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-01-19 13:48 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी) को कहा कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) के नियम राज्य के पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रोफेसरों के पदों पर सीधी भर्ती के मामलों में लागू नहीं होते हैं।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रोफेसरों की भर्ती के मामलों में राज्य भर्ती नियमों पर AICTE नियमों को प्राथमिकता दी गई।

बेंच ने कहा,

"राज्य द्वारा बनाए गए राज्य नियमों के तहत कमीशन द्वारा आयोजित राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रोफेसरों के पद पर भर्ती में भाग लेने वाले उम्मीदवार पर AICTE नियमों को लागू करना, AICTE नियमों को उसके मूल पाठ, संदर्भ और उद्देश्य से परे ले जाना होगा। कानून एक सीढ़ी के रूप में बनाए गए नियम को गेट के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देता है। इसलिए AICTE नियम राज्य नियमों के तहत सीधी भर्ती की प्रक्रिया पर लागू नहीं होते हैं।"

मामले की पृष्ठभूमि

गुजरात पब्लिक सर्विस कमीशन (GPSC) ने गुजरात राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में विभिन्न विषयों में प्रोफेसरों के सात पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया, जिसमें प्रोफेसर (प्लास्टिक इंजीनियरिंग) का एक पद भी शामिल था। प्रतिवादी-उम्मीदवार ने इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन किया था, जो सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज भर्ती नियम, 2012 के अनुसार आयोजित की गई।

उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया में भाग लेने से पहले विज्ञापन, पात्रता मानदंड और चयन विधि को चुनौती नहीं दी। इंटरव्यू राउंड में असफल होने के बाद ही, प्रतिवादी-उम्मीदवार ने चयन प्रक्रिया को चुनौती दी और इसे AICTE नियमों के खिलाफ बताया।

हाईकोर्ट के सिंगल जज ने उसकी रिट याचिका खारिज की, डिवीजन बेंच ने सिंगल जज का फैसला पलट दिया और अपीलकर्ता को AICTE नियमों के अनुसार चयन समिति गठित करने और प्रतिवादी के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए नए निर्देश जारी किए।

हाईकोर्ट के निर्देशों से व्यथित होकर GPSC सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट के निर्देशों से असहमत होते हुए जस्टिस अराधे द्वारा लिखे गए फैसले में शुरू में ही कहा गया कि प्रतिवादी, जिसने बिना किसी विरोध के चयन प्रक्रिया में भाग लिया था, असफल घोषित होने के बाद खेल के नियमों को चुनौती नहीं दे सकता। इसके अलावा, राज्य द्वारा अपने भर्ती नियमों के अनुसार आयोजित भर्ती अभियान पर AICTE नियमों की लागू होने की बात पर कोर्ट ने कहा कि AICTE नियम प्रमोशन और प्रोग्रेस के नियम हैं, जिनका इस्तेमाल शिक्षाविदों के परफॉर्मेंस इंडेक्स का आकलन करके उनके करियर की प्रगति को मार्क करने के लिए किया जाता है, इसलिए राज्य द्वारा आयोजित भर्ती अभियान राज्य के भर्ती नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।

कोर्ट ने कहा,

"उम्मीदवार द्वारा जिन AICTE नियमों पर भरोसा किया गया, वे भर्ती नियम नहीं हैं, बल्कि ये उन मौजूदा शिक्षकों के करियर को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए नियम हैं, जो पहले से ही एकेडमिक सिस्टम में हैं।”

AICTE नियमों के इस मामले में लागू न होने का एक और कारण कोर्ट ने यह बताया कि AICTE नियम उस व्यक्ति पर लागू होते हैं, जो पहले से ही प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर/असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर है, न कि उस पर जो अभी सिस्टम का हिस्सा बनने वाले हैं।

कोर्ट ने कहा,

“नियमों की पूरी योजना एक बुनियादी आधार पर आधारित है कि जिस व्यक्ति पर ये नियम लागू होते हैं, वह पहले से ही मौजूदा या नया नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर होना चाहिए। ये नियम भर्ती नियम नहीं हैं, बल्कि प्रमोशन और प्रोग्रेस के नियम हैं। नियमों में 'सीधी भर्ती' शब्द का इस्तेमाल करियर एडवांसमेंट स्कीम के एंट्री लेवल के सीमित संदर्भ में किया गया, यानी यह तय करने के लिए कि संस्थागत ढांचे के भीतर पहले से मौजूद व्यक्ति करियर एडवांसमेंट स्कीम की सीढ़ी में कैसे प्रवेश करता है। एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स, वेटेज टेबल, और इंडेक्स आधारित मूल्यांकन प्रणाली, एकेडमिक सिस्टम के भीतर जमा किए गए सर्विस प्रोफाइल, संस्थागत रिकॉर्ड, शिक्षण प्रदर्शन और रिसर्च आउटपुट को मानती है। इसलिए नियमों के प्रावधान तार्किक रूप से उस व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकते जो अभी तक उस सिस्टम का हिस्सा नहीं है।”

तदनुसार, अपील स्वीकार कर ली गई। अपीलकर्ता द्वारा की गई भर्ती को सही ठहराने वाला सिंगल जज का फैसला बहाल कर दिया गया।

Cause Title: GUJARAT PUBLIC SERVICE COMMISSION Versus GNANESHWARY DUSHYANTKUMAR SHAH & ORS.

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