इस्तीफे से खाली हुए पदों को वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता, इसके लिए नई भर्ती प्रक्रिया जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में अगर कोई उम्मीदवार जॉइन नहीं करता है या बाद में इस्तीफा दे देता है तो खाली हुए पदों को 'नई रिक्तियां' (Fresh Vacancies) माना जाएगा। इन पदों को भरने के लिए एक नई भर्ती प्रक्रिया अपनानी होगी, न कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया के तहत बनी रिज़र्व या वेटिंग लिस्ट का इस्तेमाल करके।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने कहा कि किसी भर्ती प्रक्रिया की रिज़र्व या वेटिंग लिस्ट में शामिल होने मात्र से कोई उम्मीदवार इन खाली पदों पर नियुक्ति का अधिकार नहीं जता सकता।
मामला यह है कि याचिकाकर्ताओं ने 'सिस्टम असिस्टेंट' के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जिसमें 230 उम्मीदवारों का चयन हुआ, याचिकाकर्ताओं का नाम वेटिंग/रिज़र्व लिस्ट में आया। बाद में कुछ चयनित उम्मीदवारों ने जॉइन नहीं किया, जबकि कुछ ने इस्तीफा दे दिया, जिससे कुछ पद खाली हो गए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि वे उस भर्ती प्रक्रिया की रिज़र्व/वेटिंग लिस्ट में शामिल थे, इसलिए जॉइन न करने या इस्तीफा देने से खाली हुए पदों को उनसे भरा जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इसके विपरीत प्रतिवादियों (विपक्ष) ने कहा कि इन खाली पदों को वेटिंग/रिज़र्व लिस्ट के उम्मीदवारों से नहीं भरा जा सकता। इसके लिए कानून के अनुसार एक नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
यह भी तर्क दिया गया कि 'राजस्थान स्टाफ सर्विसेज रूल्स, 2002' के तहत रिज़र्व/वेटिंग लिस्ट की वैधता या उसके इस्तेमाल के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है। साथ ही किसी सूची में नाम होने मात्र से कोई उम्मीदवार नियुक्ति का पक्का या कानूनी अधिकार हासिल नहीं कर लेता।
दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 'सुदेश कुमार गोयल बनाम हरियाणा राज्य व अन्य' मामले का हवाला देते हुए अदालत ने राय दी:
“जब कोई उम्मीदवार किसी विज्ञापित पद के लिए चयन प्रक्रिया के तहत कार्यभार संभालता है और बाद में इस्तीफा दे देता है तो ऐसे इस्तीफे से पैदा हुई रिक्ति एक नई रिक्ति मानी जाती है। ऐसी रिक्ति को आमतौर पर पिछली चयन प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई रिज़र्व/वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता, खासकर तब जब मूल विज्ञापन के तहत अधिसूचित सभी रिक्तियां पहले ही भरी जा चुकी हों। ऐसी नई रिक्ति को कानून के अनुसार एक नई भर्ती प्रक्रिया अपनाकर ही भरा जाना चाहिए।”
इस पृष्ठभूमि में अदालत प्रतिवादियों की दलीलों से सहमत हुई और माना कि इस्तीफे के कारण पैदा हुई रिक्तियां नई रिक्तियां थीं, जिन्हें मूल चयन प्रक्रिया में खाली रह गई रिक्तियां नहीं माना जा सकता। इसलिए इन्हें रिज़र्व/वेटिंग लिस्ट का उपयोग करके नहीं भरा जा सकता।
तदनुसार, याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
Case Title : Kashif Khan & Ors. v the High Court of Judicature of Rajasthan & Ors