राजस्थान हाईकोर्ट ने मंदिर के रेनोवेशन के लिए पुलिस सुरक्षा का आदेश दिया, कहा- न्यायिक आदेश सिर्फ़ कागज़ी आदेश बनकर नहीं रह सकते
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भगवान महादेव मंदिर के रेनोवेशन से जुड़े विवाद में याचिकाकर्ता के पक्ष में जारी अंतरिम रोक (इंजंक्शन) को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग वाली अर्ज़ी खारिज की गई थी। [2026 LiveLaw (Raj) 298]
जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के ऑर्डर XXXIX नियम 2-A के तहत कार्यवाही (जो सज़ा देने वाली प्रकृति की होती है) और मौजूदा रोक आदेश को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग करने वाली अर्ज़ी के बीच स्पष्ट अंतर है।
कोर्ट ने कहा कि एक बार रोक का आदेश जारी हो जाने के बाद उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सहायक निर्देश जारी करना कोर्ट की निगरानी और अंतर्निहित शक्तियों के दायरे में आता है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून की गरिमा केवल न्यायिक आदेश पारित करने में ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी है कि उनका सम्मान किया जाए और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
कोर्ट ने कहा,
"किसी मौजूदा न्यायिक आदेश को लागू करने में जानबूझकर बाधा डालना कानून के शासन की जड़ पर प्रहार करता है और यह अपने आप में एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसके लिए कोर्ट के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि पूजा स्थलों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता, तत्परता और सतर्कता की आवश्यकता होती है।
Title: Shri Mahadev Ji Kaluram Ji Ki Bawdi v Shri Milap Singh & Ors.