इस्तीफे के बाद जारी चेक बाउंस होने पर पूर्व प्राचार्य पर नहीं चल सकता मुकदमा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य के खिलाफ चेक अनादरण (चेक बाउंस) मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति ने चेक जारी होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो, उसके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि इस्तीफा देने के साथ ही याचिकाकर्ता और स्कूल के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध समाप्त हो गया था। इसलिए उनके इस्तीफे के बाद जारी किए गए चेक के लिए उन्हें आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा,
"किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाना अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि इससे उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है। किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को आपराधिक मुकदमे में घसीटने से अधिक नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। ऐसे में प्राचार्य पद से इस्तीफे के बाद जारी हुए चेक के लिए याचिकाकर्ता न तो जिम्मेदार है और न ही उत्तरदायी।"
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता सेंट सोल्जर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य के पद पर कार्यरत थे। शिकायतकर्ता के पक्ष में एक चेक जारी किया गया, जिसे याचिकाकर्ता ने सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक बताया। उन्होंने 24 मार्च 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि संबंधित चेक की तारीख 28 अप्रैल 2017 थी।
बाद में जब चेक भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया गया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण वह अनादरित हो गया। इसके बाद NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस्तीफा देने के बावजूद उन्हें केवल पूर्व प्राचार्य होने के आधार पर आरोपी बना दिया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि स्कूल के निदेशक या प्रबंधन के अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने भी स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता शिकायत दर्ज होने से पहले ही प्राचार्य पद से इस्तीफा दे चुके थे।
अदालत ने यह भी माना कि चेक की तारीख याचिकाकर्ता के इस्तीफे के बाद की। इसलिए उस समय वह न तो प्राचार्य थे और न ही स्कूल के कामकाज के लिए जिम्मेदार थे।
अदालत ने यह भी कहा कि यह "हैरान करने वाली बात" है कि स्कूल के प्रबंधन या निदेशक के खिलाफ संज्ञान नहीं लिया गया, जबकि इस्तीफा दे चुके पूर्व प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने दोहराया कि जो व्यक्ति किसी संस्था से इस्तीफा दे चुका हो और उसके कार्यों के लिए जिम्मेदार न हो, उसे इस्तीफे के बाद हुई घटनाओं के लिए परोक्ष रूप से उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ संज्ञान लेने का आदेश रद्द किया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता वास्तविक रूप से जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।