ट्रांसजेंडर अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

Update: 2026-04-24 04:46 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

यह याचिका 'नई भोर संस्था' नामक गैर-लाभकारी संगठन ने दायर की, जो राजस्थान का पहला LGBTQ समुदाय-आधारित संगठन होने का दावा करता है।

यह NGO पिछले 20 वर्षों से ट्रांसजेंडर और LGBTQ समुदाय के अधिकारों और सामाजिक विकास के लिए काम करने का दावा करता है।

याचिका में कहा गया कि यह अधिनियम 'स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान' (self-perceived gender identity) के अधिकार को छीन लेता है। इसमें तर्क दिया गया कि यह NALSA बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान के अधिकार को मान्यता दी गई।

बता दें, मूल कानून की धारा 2(k) में 'ट्रांसजेंडर' को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया, जिसका लिंग जन्म के समय उस व्यक्ति को दिए गए लिंग से मेल नहीं खाता है - चाहे उस व्यक्ति ने 'लिंग पुनर्निर्धारण सर्जरी' (Sex Reassignment Surgery) या हार्मोन थेरेपी करवाई हो या नहीं।

हालाँकि, संशोधित परिभाषा में उन 'ट्रांससेक्सुअल' व्यक्तियों और 'नॉन-बाइनरी' लोगों को बाहर कर दिया गया, जो बिना किसी मेडिकल हस्तक्षेप के अपनी स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान के आधार पर अपनी पहचान बनाते हैं।

एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने इस मामले को 4 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

Title: Nai Bhor Sanstha v Union of India and Anr.

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