राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर के रामदेवरा मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करने के लिए कमेटी बनाई। यह कमेटी भक्तों के लिए साफ़-सफ़ाई, हेल्थकेयर और कानून-व्यवस्था की ज़रूरतों पर नज़र रखेगी और इस संबंध में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएँ तैयार करेगी।

जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच एक PIL (जनहित याचिका) पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ खास महीनों में रोज़ाना आने वाले लगभग 2-3 लाख भक्तों के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और साफ़-सफ़ाई व हेल्थकेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

यह बताया गया कि भारी भीड़ के कारण भक्तों को कोई बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही थी, जिससे मंदिर के पास अफरा-तफरी जैसे हालात बन रहे थे और कई तरह की बीमारियों का खतरा पैदा हो रहा था, जिससे जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा था।

तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा,

"हेल्थकेयर और कानून-व्यवस्था का ध्यान रखना राज्य की ज़िम्मेदारी है। राज्य का यह दायित्व है कि वह विभिन्न एजेंसियों/संस्थानों के साथ मिलकर ऐसी उचित कार्रवाई करे जिससे भगदड़ और संक्रामक बीमारियों के फैलने जैसी अप्रिय घटनाओं को रोका जा सके, जो बड़ी संख्या में भक्तों के आने से हो सकती हैं..."

इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट के साथ समन्वय में व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए जोधपुर के डिवीज़नल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया।

कमेटी को भक्तों की ज़रूरतों, खासकर साफ़-सफ़ाई, मेडिकल हेल्थकेयर और कानून-व्यवस्था पर ध्यान देने और भीड़ कम होने तक बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएँ बनाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का काम सौंपा गया।

इसके अलावा, राज्य को ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कमेटी को सहयोग देने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने कमेटी को अगले कदमों पर तेज़ी से, यानी 1 हफ़्ते के भीतर फ़ैसला लेने का आदेश दिया।

Title: Mahendra Kumar Mehta v the State of Rajasthan & Ors.

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