राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों की सुनवाई में होने वाली अनावश्यक देरी को रोकने के लिए Government Advocate-cum-Additional Advocate General (GA-cum-AAG) के कार्यालय को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

जस्टिस रवि चिरानिया ने कहा कि खासकर छोटे/सामान्य अपराधों (petty offences) में जमानत अर्जी दाखिल होने के बाद संबंधित पुलिस थाने से 3 से 7 दिनों के भीतर FIR की फैक्टुअल रिपोर्ट मंगाई जाए, ताकि पहली सुनवाई में ही जमानत पर फैसला किया जा सके।

अभी क्या होता था?

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि सामान्य प्रक्रिया में जमानत अर्जी दाखिल होने के 4-5 दिन बाद पहली बार मामला सूचीबद्ध होता था और उसी समय केस डायरी मंगाई जाती थी।

इसके बाद केस डायरी आने और मामले को merits पर सुनने में 15-20 दिन तक लग जाते थे।

हाईकोर्ट ने माना कि petty offences के मामलों में यह प्रक्रिया अनावश्यक देरी पैदा करती है।

अब क्या व्यवस्था होगी?

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जैसे ही जमानत अर्जी दाखिल हो, GA-cum-AAG कार्यालय तुरंत संबंधित पुलिस थाने को इसकी सूचना देगा।

पुलिस को 3-7 दिनों के भीतर factual report उपलब्ध करानी होगी।

इस रिपोर्ट को पहली सुनवाई के समय ही कोर्ट के सामने रखा जाएगा, ताकि पर्याप्त जानकारी होने पर जमानत अर्जी का जल्द फैसला किया जा सके।

कोर्ट ने कहा कि यदि factual report पर्याप्त नहीं होगी, तभी case diary मंगाई जाएगी।

व्यक्ति की आजादी सबसे महत्वपूर्ण

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Sunny Chauhan v. State of Haryana फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि विभिन्न miscellaneous मामलों में जमानत अर्जी पर फैसला करने से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं हो सकता, क्योंकि इसमें व्यक्ति की बहुमूल्य स्वतंत्रता का सवाल शामिल होता है।

कोर्ट ने GA-cum-AAG कार्यालय को संबंधित पुलिस थानों के साथ किए गए सभी संचार का रिकॉर्ड बनाए रखने का भी निर्देश दिया।

यानी अब petty offences के मामलों में सिर्फ केस डायरी के इंतजार में जमानत सुनवाई को लंबा खींचने के बजाय, पहले factual report के आधार पर जल्द फैसला करने की व्यवस्था लागू की जाएगी।

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