जयपुर की विरासत पर संकट: यूनेस्को दर्जा बचाने के लिए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की शुरू
जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे की विरासत को हो रहे नुकसान और शहर का यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा खतरे में पड़ने की आशंका को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की। हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक परकोटे की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इसकी विश्व धरोहर पहचान को बचाने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की गंभीर आवश्यकता है।
मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने मामले को जनहित याचिका के रूप में सूचीबद्ध करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए। अदालत ने विभिन्न सरकारी अधिकारियों को संबंधित आंकड़ों और जानकारियों के साथ शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
यह मामला जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर द्वारा राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित एक खबर पर संज्ञान लेने के बाद सामने आया। खबर में जयपुर की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण, सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया गया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जयपुर परकोटा क्षेत्र की विरासत के संरक्षण और सुरक्षा के लिए बनाए गए वर्ष 2020 के नियमों को लागू करने में सरकारी अधिकारियों की विफलता सामने आई। इसके चलते क्षेत्र में अवैध निर्माण, इमारतों में अनधिकृत बदलाव और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की स्थिति बनी। इन गतिविधियों से उस स्थापत्य विशेषता और ऐतिहासिक स्वरूप को नुकसान पहुंच रहा है, जिसके आधार पर जयपुर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पहचान मिली थी। जयपुर को वर्ष 2019 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि विरासत को हो रहे नुकसान से जुड़ी चिंताएं केवल आशंकाओं तक सीमित नहीं हैं। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान दिया गया है और विश्व धरोहर समिति ने जयपुर के परकोटा क्षेत्र में संरक्षण की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विश्व धरोहर का दर्जा केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय पहचान, पर्यटन की संभावनाएं और सामूहिक गौरव भी जुड़े हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस दर्जे के छिनने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जयपुर की वैश्विक प्रतिष्ठा कम होगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए सौंपी गई विरासत की रक्षा करने में विफलता सामने आएगी। इससे ऐसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपदा का अपूरणीय नुकसान होगा, जिसकी दोबारा भरपाई संभव नहीं है।
हाईकोर्ट ने विरासत संरक्षण के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 49, अनुच्छेद 51(क)(च) में निहित नागरिकों के मूल कर्तव्य और सार्वजनिक न्यास के सिद्धांत का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि विश्व धरोहर समिति की रिपोर्ट में उजागर की गई कमियों को दूर करने और संबंधित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती कदम उठाना उचित है।
इसी आधार पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब और आवश्यक आंकड़े मांगे हैं। मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश दिए गए।
जयपुर की विरासत को बचाने के लिए इससे पहले भी हाईकोर्ट की अन्य खंडपीठ ने अगस्त में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को संरक्षित करना था। अब इस जनहित याचिका के जरिए परकोटा क्षेत्र में विरासत संरक्षण नियमों के पालन, अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर नियंत्रण तथा जयपुर के विश्व धरोहर दर्जे की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई होगी।